मोकामा और गोपालगंज विधानसभा उपचुनाव में जीत को लेकर दोनों गठबंधन आश्वस्त, नीतीश कुमार की चुप्पी से खड़े हो रहे हैं कई सवाल

संतोष कुमार सिंह

पटनाः बिहार में दो सीटों पर तीन नवंबर को विधानसभा उपचुनाव होने वाले हैं। ये सीटे हैं गोपालगंज और मोकामा। गोपालगंज सीट भाजपा के कब्जे में रही है वहीं मोकामा सीट राजद के कब्जे में। स्वाभाविक है कि दोनो दल या कहें तो दोनों गठबंधन चाहे महागठबंधन हो या फिर एनडीए हर कीमत पर अपने पाले में करना चाहते हैं। उल्लेखनीय है कि इन दोनों सीटों में से कहीं भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू चुनाव नहीं लड़ रही है बावजूद इसके इन सीटों पर होने वाले जीत हार से महागंठबंधन सरकार के भविष्य पर निश्चित रूप से फर्क पड़ेगा इस बात को लेकर किसी को कोई संदेह नहीं है यही कारण है कि दोनों ही गठबंधन हर कीमत पर इन सीटों को अपने पाले में लाना चाहती है।

क्या है सियासी समीकरण

सबसे पहले बात करते हैं मोकामा सीट की। मोकामा विधानसभा सीट पर उपचुनाव हो रहा है। इस सीट पर राजद के बाहुबली नेता अनंत सिंह का दबदबा रहा है। वो पिछले 18 सालों से इस सीट पर कब्जा जमाए हुए हैं। जेल में बंद अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता खत्म हो गयी है तो उपचुनाव हो रहा है। इस लिहाज से इस सीट पर राजद का दावा बनता तो महागठबंधन की तरफ से अनंत सिंह की पत्नी को ही उम्मीदवार बनाया गया है। यानी राजद की तरफ से अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी को टिकट थमाया गया है।

वहीं भाजपा की तरफ से अनंत सिंह के खिलाफ ताल ठोकते रहने वाले ललन सिंह की पत्नी सोनम देवी को प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतारा गया है।

उल्लेखनीय है कि अनंत सिंह 18 सालों से मोकामा के विधायक रहे हैंण् इस दौरान उन्होंने कभी राजद तो कभी जदयू का दामन थामाण् तो कभी वो निर्दलीय भी मैदान में उतरे, लेकिन हरबार उन्हें जीत ही मिली। यहां तक कि विधानसभा चुनाव 2020 में वो जेल में ही बंद थे लेकिन जीत ही दर्ज की। उधर भाजपा इस सीट पर 27 साल बाद प्रत्याशी मैदान में उतार रही है।

1995 में भाजपा ने आखिरी बार प्रमोद कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारा था। उसके बाद से अभी तक बीजेपी ने गठबंधन के तहत दूसरे घटक दल को ही ये सीट सौंपा है। अब जदयू भाजपा से अलग है जिसके बाद इस सीट पर बीजेपी उम्मीदवार उतरीं है। हालांकि भाजपा को इस सीट पर पूर्व सांसद व बाहुबली सूरजभान सिंह का साथ मिल रहा है ऐसे में उंट किस करवट बैठेगा इसको लेकर राजनीतिक पंडितों की निगाहें इस सीट पर लगी हुई हैं क्योंकि सूरजभान सिंह अनंत सिंह के बड़े भाई दिलिप सिंह को हराकर इस सीट से विधायक बने थे।

गोपालगंज सीट का सूरते हाल

राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद के गृह जिले गोपालगंज की इस सीट पर वर्ष 2005 से भाजपा का कब्जा है। इस सीट पर पिछले डेढ़ दशक से जीत रहे सुभाष सिंह के निधन के बाद भाजपा ने उनकी पत्नी कुसुम देवी को उम्मीदवार बनाया है। वहीं राजद की तरफ से राजद ने मोहन गुप्ता को उम्मदीवार बनाया गया है जिन्हें महागठबंधन में शामिल सात दलों का समर्थन हासिल है।

दोनों दलों या कहें गठबंधनों की इस सीट को लेकर अपनी-अपनी दावेदारी है और दोनों जीत का दावा कर रहे हैं। भाजपा का कहना है कि सुभाष सिंह इस इलाके के लोकप्रिय नेता थे। गोपालगंज की जनता उपचुनाव में महागठबंधन को मुंहतोड़ जवाब देगी और अपने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देने के लिए हमारे उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करेगी। वहीं राजद का कहना है कि भाजपा मतदाताओं की सहानुभूति को भुनाने की कोशिश कर रही है। लेकिन हमारा उम्मीदवार भारी अंतर से सीट जीतेगा। भाजपा पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है और उसके प्रत्याशी की जमानत राशि जब्त हो जाएगी।

इनके अलावा भी हैं दावेदार

गोपालगंज में राजद व भाजपा के अलावा बहुजन समाज पार्टी भी मुकाबले में है जिसने इंदिरा यादव को टिकट दिया है। इंदिरा लालू प्रसाद के साले अनिरुद्ध यादव उर्फ साधु यादव की पत्नी हैं। वहीं असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन ;एआईएमआईएम, के असलम मुखिया भी चुनावी दंगल में हैं।

बिहार विधानसभा के 2020 के चुनाव में सुभाष सिंह ने साधु यादव को 36 हजार वोटों से हराकर इस सीट पर जीत हासिल की थी। कांग्रेस के आसिफ गफूर 36 हजार वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे।

राजद के पक्ष में उतरे मुकेश सहनी

सन आफ मल्लाह कहे जानेवाले मुकेश सहनी ने अपनी पार्टी विकासशील इंसान पार्टी की तरफ से चुनाव न लड़ने की घोषणा करते हुए बिहार विधानसभा की दोनों सीटों मोकामा एवं गोपालगंज पर होने जा रहे उपचुनाव में राजद उम्मीदवार को समर्थन देने का एलान कर दिया है। मुकेश सहनी ने कहा है कि वीआईपी दोनों सीट से चुनाव नहीं लड़ेगी, लेकिन भाजपा को हराने का काम करेगी।

जीत हार किसकी होगी यह तो आगामी 3 नवंबर को होने वाले मतदान के बाद ही पता चल पायेगा लेकिन इन दोनों सीटों पर महागठबंधन जदयू की तरफ से किसी बड़े नेता का चुनाव प्रचार में शामिल न होना कई सवाल खड़ा कर रहा है । यहां तक की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी इन चुनावों पर चुप्पी साध रखी है।

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