जाट लैंड कहे जाने वाले हरियाणा में बीजेपी फिर से गैर-जाट मिशन लेकर उतरी है. जहाँ एक तरफ कांग्रेस ने जाट बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले भूपेंद्र हुड्डा के साथ साथ 27 जाट उम्मीदवारों को टिकेट दिया है तो वहीँ बीजेपी ने इसका ठीक उल्टा किया है. लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या हरियाणा में बीजेपी की इस सोशल इंजीनियरिंग क्या परिणाम होगा?
बीजेपी को गैर-जाट पसंद हैं…
2014 में जिस तरह बीजेपी को गैर जाट वोटों का फायदा मिला था वैसे ही इस बार भी बीजेपी यह कयास लगाये बैठी है. बीजेपी के नेताओं का कहना है कि बीजेपी द्वारा 370 हटाए जाने का भी असर वोट बैंकों पर पड़ सकता है.इसके साथ ही बीजेपी को मनोहर लाल खट्टर की साफ़ छवि पर भरोसा है. बीजेपी एक बार फिर से मुख्यमंत्री के तौर पर मनोहर लाल खट्टर को देख रही है. साल 2014 में मुख्यमंत्री पद के लिए खट्टर के नाम से बहुत लोगों को हैरानी हुई थी. इस बार मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने राज्य में मिशन 75+ का लक्ष्य रखा है.
जहां एक तरफ बीजेपी फिर राज्य में बड़ी जीत के साथ सत्ता में लौटने को लेकर आश्वस्त है तो वहीँ चुनाव करीब आते आते कांग्रेस की गुटबाजी कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है. लेकिन राज्य के कद्दावर नेताओं में से एक भूपेंद्र सिंह हुड्डा मैदान में अडिग जमे हुए हैं. हुड्डा के बाघी तेवरों को देखते हुए ना सिर्फ कांग्रेस के हाईकमान ने उन्हें नेता विपक्ष की कमान दी है बल्कि इसके साथ ही उनके कहने पर अशोक तंवर को अध्यक्ष पद से हटाया भी है. बड़ी छवि रखने वाले भूपेंद्र सिंह ने राजनीति में 30 साल से ज्यादा लंबा वक़्त गुजारा है.
हरियाणा में जीत का झंडा लहराने के लिए जहाँ एक तरफ बीजेपी ने गैर जाटों पर भरोसा जताते हुए जाट लैंड में सिर्फ 20 जाट उमीदवारों को उतारा है तो वहीँ कांग्रेस ने एक बार फिर से भूपिंदर सिंह हुड्डा पर भरोसा जताते हुए हरियाणा विधानसभा चुनाव की कमान उनके हाथों में सौंप दी है. JJP ने 34 जाट उम्मीदवारों को चुनाव में उतारा है. अब 24 अक्टूबर को यह साफ़ हो जायेगा कि बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंगबाजी मारेगी या फिर विपक्ष जीत का झंडा लहराएगा.