वो 6 फिट 4 इंच लम्बा था,वजन था 160 किलो.
वो एक अच्छा मुक्केबाज था जो लगातार 9 सालों तक नेशनल चैंपियन रहा.
उसने अपने शासन काल के दौरान तकरीबन 6 लाख लोगों की हत्या करवाई थी.
उसने 6 शादियाँ की थी और उसके 45 बच्चे थे.
उसे अफ्रीका का हिटलर कहा जाता था.
उसके बारे में ये बात आम थी कि वो नरभक्षी है और उसने अपनी पत्नी और उसके प्रेमी की हत्या कर उनका मांस खा लिया है.
ये कहानी है, युगांडा के काले इतिहास की.
ये कहानी है, युगांडा के तानाशाह सैन्य शासक ईदी अमीन की-
सेना का एक खानसामा जो राष्ट्रपति बन बैठा
ये साल 1971 की जनवरी का महिना था. युगांडा के प्रधानमन्त्री मिल्टन ओबैटो अपने राजनयिक दौरे पर सिंगापूर में थे.
25 जनवरी को अचानक युगांडा की सेना की टुकड़ियों ने कम्पाला शहर में डेरा डालना शुरू कर दिया और तिन घंटे के भीतर पुरे शहर में सेना मार्च करने लगी.
कम्पाला युगांडा की राजधानी थी जिस पर अब सेना का कब्जा हो चूका था.
कुछ देर बाद ऐलान हुआ कि अब युगांडा पर सेना की हुकुमत है और नये शासनाध्यक्ष होंगे ईदी अमीन
ईदी अमीन उन दिनों यूगांडा की सेना का जनरल हुआ करता था.
उसने अपनी पहली नौकरी सेना के एक खानसामे के रूप में शुरू करी थी.
160 किलो वजनी और 6 फिट 4 इंच की लम्बाई वाला ईदी दरअसल एक अच्छा बॉक्सर था जो लगातार 9 सालों तक राष्ट्रीय बॉक्सिंग चैम्पियन बना रहा.
एक अच्छा बॉक्सर होना उसके लिए फायदे का सौदा साबित हुआ और उसने तेजी से तरक्की करी.
इस बीच अपने उच्चाधिकारियों का विश्वास भी ईदी जीतता रहा और आम जनता में भी बॉक्सर के रूप में ख़ासा लोकप्रिय हुआ.
इसकी लोकप्रियता और इसके प्रति अधिकारीयों और सरकार की विश्वसनीयता का आलम ये था कि 1965 में इसे वहाँ के प्रधानमन्त्री ने सेनाध्यक्ष बना दिया.
फिर आया 25 जनवरी 1971 का वो दिन जब ईदी अमीन ने सेना की मदद से युगांडा पर कब्जा कर लिया और खुद राष्ट्रपति बन बैठा.
हालांकि जब उसने तख्तापलट किया तब युगांडा के बहूत से लोगों ने खुशियाँ मनाई.
उन्हें लगा की ईदी किसी मसीहे की तरह आया है, जो देश की बहूत सी समस्यायों को समाप्त के देगा.
ये गलतफहमियां जल्द ही दूर हो गयी क्योंकि इसके बाद जब तक ईदी ने वहां शासन किया तब तक हर दिन सड़कों पर खून बहता रहा.
खून भरे 8 साल
ईदी ने युगांडा पर 8 साल 2 माह और 17 दिनों तक राज किया.
हर दिन युगांडा की खून से रंगी सड़कें ये बताती थी की युगांडा में एक ऐसे व्यक्ति का शासन है जिसके ह्रदय में दया और मानवता की कोई जगह नहीं.
ईदी के शासन काल में हर उस व्यक्ति की सजा मौत होती थी जो उसे पसंद नहीं आता था या जो उसकी मुखालफत करता था.
उसने 6 शादियाँ की थी बावजूद इसके जो भी लड़की उसे पसंद आ जाती थी उसे वो किडनैप करा लेता था.
इन 8 सालों में ईदी अमीन की खुनी सनक से कोई नहीं बच पाया चाहे वो सेना के अधिकारी रहें हों, राजनेता रहे हों या फिर कोई आम नागरिक.
इन 8 सालों में ईदी ने बेरोक-टोक मनमाने ढंग से युगांडा पर शासन किया.
युगांडा के लोग आज भी ईदी अमीन को याद करते हुए सिहर उथते हैं क्योंकि वास्तव में ये खून भरे शासन के 8 साल थे जिनमें हर दिन युगांडा की सड़कें लाल होती रही.
एक तानाशाह जो भगोड़ा बन गया
ये 1978 का साल था, तारीख थी 30 अक्टूबर.
ईदी ने अपनी सेना को आदेश दिया कि पड़ोसी मुल्क तंजानिया पर हमला किया जाए साथ ही उसने अपने मित्र कर्नल गद्दाफी से मदद माँगी जो लीबिया का तानाशाह था.
ये युद्ध 6 महीने तक चला और तंजानिया की सेना बहादूरी से लड़ती रही.
10 अप्रैल 1979 का वो ऐतिहासिक दिन था जब तंजानिया की सेना ने लीबिया और युगांडा के सैनिकों को खदेड़ दिया और कम्पाला पर कब्जा कर लिया.
हालांकि ईदी अमीन वहां से निकल भागने में सफल रहा और लीबिया पहुँच गया.
तकरीबन दो वर्षों तक लीबिया में रहने के बाद ईदी अमीन सऊदी पहुँचा और अपनी मौत तक वहीँ रहता रहा.
20 जुलाई 2003 को अपनी बीमारी के चलते ईदी ने सऊदी में ही अंतिम साँस ली और उसे वहीँ दफ़न किया गया.
एक क्रूर तानाशाह जिसकी दुनिया में तूती बोलती थी, जब वो भगोड़ा बना तो उसे उसके वतन की मिट्टी भी नसीब नहीं हुयी.
राष्ट्रपति जिसने मुख्य न्यायाधीश के मांस को खा लिया
नर मांस खाने वालों को आदमखोर या नरभक्षी कहा जाता है.
बहुत से नरभक्षियों की कहानी सार्वजनिक पटलों पर अक्सर आती रही है परन्तु तब क्या हो जब किसी देश का राष्ट्रपति ही आदमखोर हो जाए!
आधुनिक काल में ईदी ही वो शासक था जिस पर आदमखोर होने के ना सिर्फ आरोप लगे बल्कि इस बात के पुख्ता सबूत भी मिले.
ये 1975 का साल था जब ईदी युगांडा के मुख्य न्यायाधीश से नाराज हो गया और उनकी हत्या करवा दी.
हत्या के बाद पोस्टमार्टम की कार्यवाही चल ही रही थी की तभी वहाँ ईदी अमीन आ धमका.
उसने सभी डॉक्टरों को कमरे से बाहर जाने का हुक्म दिया और लगभग 30 मिनट तक उस शव के साथ रहा.
जब डॉक्टर उस कमरे में वापस आये तब मुख्य न्यायाधीश के शरीर के कई हिस्से नदारद थे.
ऐसा पहली बार नहीं था जब ईदी पर नरभक्षी होने का आरोप लगा हो.
इससे पहले भी ईदी के डॉक्टर किबो रिन्गोता खुद ये बता चुके थे कि उन्होंने ईदी के फ्रीज में नर मुंड और नर मांस के टुकड़े देखे हैं जिन्हें ईदी खाया करता था.
ईदी ने अपनी दुसरी पत्नी के अडोरा और उसके प्रेमी की भी ना सिर्फ हत्या की थी बल्कि उनके मांस को भी खा लिया था.
ईदी अमीन के आदमखोर होने की बात उस दौर में अन्य मुल्कों तक भी पहुंची लेकिन ईदी की अरब देशों और ख़ास तौर पर लीबिया के तानाशाह कर्नल गद्दाफी से नजदीकी के कारण उस पर कोई अंतर्राष्ट्रीय दबाव नहीं बनाया जा सका.
ईदी गुजरे तानाशाहों में वाहिद एक ऐसा शासक था जिसने नर मांस को खाने जैसा घृणित कार्य किया हो.
जब ईदी ने इंदिरा गाँधी की एक ना सुनी
एक दिन सुबह-सुबह युगांडा के लोगों ने रेडियो पर एक घोषणा सुनी कि युगांडा में रह रहे ब्रिटिश और एशियाई मूल के लोग 90 दिनों के भीतर सिर्फ दो सूटकेस लेकर युगांडा छोड़कर चले जाएँ.
ये एक गहरा सदमा था उन तमाम भारतीयों के लिए जो वर्षों से वहां रह रहे थे और खुद को अच्छी तरह से स्थापित कर चुके थे.
तत्कालीन भारतीय प्रधानमन्त्री इंदिरा गाँधी ने ईदी को बहुत समझाने की कोशिश की पर नतीजा ढाक के तीन पात.
नतीजतन भारतीय मूल के लाखों लोगों को युगांडा में अपनी सम्पत्ति छोड़कर पलायन करना पड़ा.
ईदी अमीन निश्चित तौर पर आधुनिक समय का क्रूरतम तानाशाह था जिसने अपने शासन काल के दौरान वो खुनी इबारत लिखी जिसे याद कर के सिहर जाना लाजमी है.
ईदी अमीन की कहानी युगांडा के काले दिनों की कहानी है जिसने ना सिर्फ युगांडा के विकास को बाधित किया बल्कि उसकी अर्थव्यवस्था को हासिये पर धकेल दिया.