ईरान से तेल आयात पर लगाए अमेरिकी प्रतिबंध के खिलाफ हसन रुहानी ने कई बार मोर्चा खोला है. रुहानी इसे बार-बार आर्थिक युद्ध करार देते रहे हैं. ट्रंप सरकार ने पिछले साल अमेरिका को ईरान परमाणु समझौते से बाहर खींचते हुए उस पर फिर से प्रतिबंध लगाए थे.
टेलीविजन पर अपने संबोधन में हसन ने कहा, अमेरिका कह रहा है कि ईरान को 1979 की इस्लामिक क्रांति के पहले वाले देश के तौर पर होना होगा जब यहां पर अमेरिका समर्थित राजशाही थी.
ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी ने कहा कि अमेरिका के साथ सुलह या समझौता के कोई आसार नहीं हैं. उत्तरी शहर लाहीजान में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए रुहानी ने कहा, ईरान वापस नहीं लौटेगा. ईरान और अमेरिका के बीच मतभेद इतना गहरा चुका है ना तो कोई समझौता हो सकता है ना ही सुलह होगी.
रुहानी ने कहा कि अमेरिकी पाबंदी के कारण उनका देश आर्थिक युद्ध में फंसा है और अमेरिकी मांगों के आगे झुकने का मतलब आजादी और लोकतंत्र सहित तमाम ऐतिहासिक उपलब्धियों को गंवाना होगा. दरअसल ट्रंप प्रशासन ने ईरान के खिलाफ कई सख्त कदम उटाए हैं जिससे इस देश को बड़ा आर्थिक झटका लगा है.