यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ये कहते हुए नहीं थकते कि उनकी सरकार गरीबों के लिए काम करती है. लेकिन हकीकत कुछ और ही है. दरअसल जिस गोरखपुर से 4 साल सांसद रहे योगी आदित्यानाथ. और आज भी उनका सबसे पसंसदीदा शहर गोरखपुर ही है. उसी गोरखपुर का सरकारी अमला कितना बेईमान हो चुका है.
यूपी के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने सरकार बनने पहले ही दिन कह दिया था कि यूपी के गरीब पिछड़े और सोशित अब अपने आपको अकेला न समझें. क्योंकि यूपी की सरकार उनके साथ खड़ी है. और उनके साथ किसी प्रकार के अन्याय को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. जब यूपी के मुखिया ने इस बात का एलान किया था. तो यूपी के गरीबों की आस जगी थी उनको मदद मिलेगी.
लेकिन गोरखपुर के बांसगांव के रहने वाले सुरेन्द्र और रेखा सिंह के हालात को देख कर ऐसा लगता है कि सरकार के द्वारा किए गए सभी वादे झूठे साबित हो रहे हैं. बता दें कि ये दोनों लोग नगरपंचायत गोरखपुर के कर्मचारी है. इनकी समस्या ये है कि सभी कर्मचारी अपने वेतन की मांग के लिए कई बार आला अधिकारियों से लेकर नेताओं तक को पत्र के जरिये अपनी समस्या को बता भी चुके हैं. लेकिन न तो पत्र का कोई जवाब आया और न हीं इनके वेतन को लेकर किसी ने कोई कार्रवाई की.
ऐसे में ये बेचारे बेबस और लाचार हैं. और मजे की बात देखिए कि जिस नगरपंचायत के कर्माचारियों की सैलरी नहीं आ रही है. उसी नगर पंचायत में 1 करोड़ 82 लाख घोटाला हो चुका है. और जिस विकास को दिखाकर सारे पैसे को हड़पा गया उसका कुछ अता पता ही नहीं है.