अभिनंदन के बाद अब सुजान के परिवार वाले कर रहे हैं रिहाई की मांग

विंग कमांडर की रिहाई के बाद क्या देश के 54 युद्धबंधियों की भी रिहाई का रास्ता साफ होगा. दरअसल, ऐसा माना जाता है कि पाकिस्तान की जेल में अभी भी 54 भारतीय युद्धबंदी बंद हैं. ऐसे ही एक युद्धबंदी हैं पंजाब के सुजान सिंह. सुजान के परिवार का दावा है कि वो अभी भी पाकिस्तान की जेल में हैं और उनकी मांग है कि अब सरकार को उन्हें छुड़ाने की कोशिश करनी चाहिए.

बता दें कि गुरदासपुर के बरनाला गांव के सुजान सिंह 1957 में सेना की 14 फील्ड रेजीमेंट में भर्ती हुए थे. वर्दी को पहनकर सुजान का सीना चौड़ा हो जाता था. कहते थे कि देश के लिए सीने पर वर्दी पहनी है, और कभी युद्ध में मौका मिला तो वर्दी की आन-बान और शान रखूंगा. शायद ईश्वर ने उनकी सुन ली. 1965 में पाकिस्तान ने भारत पर हमला कर दिया.

भारत ने युद्ध में पाकिस्तान के दांत खट्ठे कर दिए. हजारों सैनिकों के शौर्य ने पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया. युद्ध खत्म हो गया. लेकिन सुजान सिंह घर नहीं लौटे. परिवार वालों को लगा कि शायद सुजान सिंह युद्ध में शहीद हो गए. लेकिन-कुछ बरस बाद उन्हें ये खत मिला. पाकिस्तान की सियालकोट जेल से लिखे इस खत में सुजान ने आपबीती भी बताई और बताया कि वो बतौर युद्धबंदी जेल में बंद हैं. इस खत के मिलने के बाद से सैकड़ों बार परिवारवालों ने सुजान सिंह की रिहाई के लिए सरकार से गुहार लगाई लेकिन कुछ हुआ नहीं.

लेकिन, जिस तरह विंग कमांडर अभिनंदन की 48 घंटे के भीतर रिहाई हुई, उसने परिवारवालों की दुखती रग पर हाथ भी रख दिया और उम्मीद की एक लौ भी जला दी कि शायद अब बाकी युद्धबंदियों की सरकार सुध ले. तो अब सवाल यही है कि क्या सुजान सिंह की कोई सुध लेगा. अगर सुजान पाकिस्तान की जेल में बंद हैं तो उन्हें वापस लौटना ही चाहिए और अगर उनका निधन भी हो चुका है तो इस बात को उनके परिवार को जानने का पूरा हक है.

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