Tirupati Temple Controversy: आंध्र प्रदेश के तिरुपति बाला जी मंदिर की पवित्रता और प्रसादम को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेश की तेलुगु देशम पार्टी ने दो दिन के अंदर दो दावे किए। टीडीपी सरकार ने आरोप लगाते हुए कहा कि मंदिर की पवित्रता के साथ खिलवाड़ किया गया है। लड्डू प्रसादम में जानवरों की चर्बी वाला घी और फिश ऑयल मिलाया गया था।
टीडीपी ने यह आरोप एक लैब रिपोर्ट के हवाले से लगाए। आरोपों के बाद वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने हाईकोर्ट का रूख किया और नायडू सरकार के आरोपों की जांच के लिए एक कमेटी बनाने की मांग की। अब इस मामले पर हाईकोर्ट 25 सितंबर को सुनवाई करेगा। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा था कि पिछले 5 साल में जगन मोहन सरकार और वाईएसआरसीपी के नेताओं ने तिरुमाला की पवित्रता को धूमिल किया है।
तिरुपति मंदिर के 300 साल पुराने किचन में रोजाना 3.50 लाख लड्डू बनते हैं। तिरुमाला ट्रस्ट हर साल प्रसादम से सालाना 500 करोड़ रुपए कमाता है। जगन मोहन सरकार ने इस मंदिर और प्रसाद की पवित्रता को धूमिल करने का काम किया है। इस दौरान टीडीपी की ओर से एक लैब जांच की रिपोर्ट को दिखाया गया।
लैब रिपोर्ट में क्या-क्या मिला
टीडीपी के दावे के मुताबिक, जांच रिपोर्ट में सोयाबीन, सनफ्लावर, जैतून का तेल, फिश ऑयल, बीफ टैलो, नारियल कॉन सीड, अलसी और लार्ड पाया गया है। बीफ टैलो यानि जानवरों की चर्बी को धीमी आंच पर पकाया जाता है। बाद में यह फैट रह जाता है और घी जैसी दिखाई देती है। लार्ड सुअर की चर्बी से बनाया जाता है। यह चिकना होता है और आसानी से मिलावट की जा सकती है।
तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) ने मंदिर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। हालांकि, घी की गुणवत्ता की निगरानी के लिए चार सदस्यीय विशेष समिति बना दी है। लैब रिपोर्ट 17 जुलाई को मिली थी। तभी से ही यह रिपोर्ट पब्लिक डोमेन में है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्ट में ना तो जारी करने वाली संस्था का नाम लिखा है और ना ही किस जगह के सैंपल की जांच की गई है, उसका जिक्र है।