Loksabha Chunav 2024: लोकसभा चुनाव 2024 का पहले चरण का मतदान हो चुका है। अब देश में 26 अप्रैल को दूसरे चरण का मतदान है लेकिन, इससे पहले बीजेपी के लिए बड़ी ख़बर सामने आई है। गुजरात की सूरत लोकसभा सीट से बीजेपी प्रत्याशी मुकेश दलाल निर्विरोध जीत गए। इसी के साथ बीजेपी की लोकसभा चुनाव में खाता खुल गया। कांग्रेस ने इसे मैच फिक्सिंग बताया है।
दरअसल, सूरत लोकसभा सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी निलेश कुम्भानी चुनाव अधिकारी के समक्ष अपने तीन में से एक भी प्रस्तावक को मौजूद नहीं रख पाए थे जिसके बाद चुनाव अधिकारी ने निलेश कुम्भानी का नामांकन फॉर्म रद्द कर दिया था। बीजेपी ने कांग्रेस के प्रत्याशी निलेश कुम्भानी के फॉर्म में उनके तीन प्रस्तावकों के हस्ताक्षर को लेकर सवाल उठाए थे।
अपने प्रत्याशी का नामांकन रद्द होने का आरोप कांग्रेस ने बीजेपी पर लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी की सरकार में सब डरे हुए हैं। कांग्रेस नेता और एडवोकेट बाबू मांगुकीया ने कहा हमारे तीनों प्रस्तावकों का अपहरण हुआ है, चुनाव अधिकारी को अभी फॉर्म पर हस्ताक्षर हुए हैं या नहीं, इसकी नहीं बल्कि अपहरण की जांच करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हस्ताक्षर टेली किए बगैर फॉर्म रद्द करना गलत है, प्रस्तावकों के हस्ताक्षर सही हैं या गलत उसकी जांच के बगैर फॉर्म रद्द करना गलत है।
वहीं, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसे मैच फिक्स करार दिया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, लोकतंत्र खतरे में है। आप कालक्रम समझिए। सूरत जिला चुनाव अधिकारी ने सूरत लोकसभा के लिए कांग्रेस के उम्मीदवार नीलेश कुम्भानी का नामांकन ‘तीन प्रस्तावकों के हस्ताक्षर के सत्यापन में विसंगतियों’ के कारण खारिज कर दिया। समान आधार पर, अधिकारियों ने सूरत से कांग्रेस के स्थानापन्न उम्मीदवार सुरेश पडसाला के नामांकन को खारिज कर दिया। कांग्रेस पार्टी बिना उम्मीदवार के रह गई है।
जीवनकाल का सबसे महत्वपूर्ण चुनाव- जयराम रमेश
बीजेपी प्रत्याशी मुकेश दलाल को छोड़कर बाकी सभी उम्मीदवारों ने अपना नामांकन वापस ले लिया। 7 मई 2024 को मतदान से लगभग दो सप्ताह पहले 22 अप्रैल, 2024 को सूरत लोकसभा सीट से बीजेपी प्रत्याशी को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। मोदी के अन्य काल में एमएसएमई मालिकों और व्यवसायियों के संकट और गुस्से ने बीजेपी को इतनी बुरी तरह से डरा दिया है कि वे सूरत लोकसभा को “मैच-फ़िक्स” करने का प्रयास कर रहे हैं, जिसे उन्होंने 1984 के लोकसभा चुनावों के बाद से लगातार जीता है। हमारे चुनाव, हमारा लोकतंत्र, बाबासाहेब अम्बेडकर का संविधान – सभी एक पीढ़ीगत खतरे में हैं। यह हमारे जीवनकाल का सबसे महत्वपूर्ण चुनाव है।