नई दिल्ली : चुनाव आयोग द्वारा तारीखों की घोषणा के साथ ही चुनावी दंगल शुरू हो चूका है। देश की जनता अपने वोट से चोट करने के लिए तैयार है, तो वहीं नेता भी ताबड़तोड़ रैलियों के साथ जनता के बीच जाने के लिए तैयार हैं।
17वीं लोकसभा में इस बार की लड़ाई पूरी तरह एनडीए के राष्ट्रवाद और यूपीए के गाँधीवाद के बीच रहेगी।
एनडीए सरकार सर्जिकल और एयर स्ट्राइक अपनी पीठ ख़ुद ही थपथपा रही है, वह बाकि तमाम मुद्दों को दरकिनार कर राष्ट्रवाद को ही अपना मुख्य एजेंडा बना कर, जनता के बीच वोट मांग रही है। भले ही वह रोज़गार, किसानों का कर्ज़ न माफ़ करने और रॉफेल में भ्रष्ट्राचार को लेकर विपक्ष के घेरे जाने पर चुप्पी साधती आयी है।
वहीं विपक्ष में बैठी यूपीए की सरकार एनडीए के आक्रामक राष्ट्रवाद के खिलाफ़ गाँधीवादी राष्ट्रवाद के साथ, इस बार आम चुनाव में जनता के बीच जा कर ये संदेश देना चाहती है कि, अभी भी महात्मा गांधी की विरासत उसी के पास है, और वही इसकी असली वारिस है।
मोदी और शाह के गढ़ गुजरात की राजधानी अहमदाबाद में कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक के बाद हुई रैली में बहुत हद तक कांग्रेस पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति के संकेत दिए हैं। इस रैली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ मौजूद थे। ये पहला मौका था जब गांधी परिवार के तीन लोग एक साथ पार्टी की कार्यसमीति बैठक में शामिल हुए।प्रियंका गांधी ने इस चुनाव दंगल की अपनी पहली रैली को संबोधित किया। प्रियंका ने अपने संबोधन में कहा कि, यह देश प्रेम, सद्भावना और आपसी लगाव के आधार पर बना है। मैं दिल से कहना चाहती हूँ इससे बड़ी कोई देशभक्ति नहीं है कि आप जागरूक बनें।आपकी जागरूकता एक हथियार है।
हालांकि, इस बार विपक्ष मज़बूती के साथ तत्कालीनसरकार के सामने तन कर खड़ा है। वहीं कांग्रेस ने बीजेपी के आक्रामक राष्ट्रवाद के खिलाफ़ अपने सहिष्णु राष्ट्रवाद से करारा जवाब दिया है। लेकिन वह इसे चुनावी मुद्दा नहीं बनाना चाहती है। कोंग्रस जनता से जुड़े मुद्दों के साथ चुनावी दंगल में आई है। वह राफेल, रोजगार, किसानों और महिला सुरक्षा के मुद्दों पर सरकार को घेरती आयी है।
देखना दिलचस्प होगा कि इस बार के लोकसभा चुनाव परिणामों में कौन-सी पार्टी मुकद्दर का सिकंदर बनती है और कौन-सी पार्टी चारों खाने चित होती है।