“Remembering Galwan”: भारत-चीन के बीच हुए गलवान हिंसा के तीन साल

नई दिल्ली:भारत और चीन के बीच गलवान घाटी हुई हिंसा को आज तीन साल पूरे हो चुके हैं। दोनों देशों की सेनाओं के बीच5 जून, 2020 को खूनी संघर्ष हुआ था। इस झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। जबकि चीन ने अपने जवानों की मौत का आकड़ा पेश नहीं किया था।

भारत-चीन के बीच पिछले 5 दशक बड़ी हिंसा

पिछले 5 दशक में एलएसी पर भारत और चीन के बीच यह पहला संघर्ष था जिससे दोनों देशों के संबंधों में एक बार फिर तनाव ला दिया था।भारत और चीन की सेनाएं सीमा पर इस तनाव को कम करने के लिए लगातार बातचीत कर रही हैं। जानकारी के मुताबिकइस संघर्ष के बाद से चीन के साथ करीब 3500 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सैन्य ढांचे, निगरानी और लड़ाकू क्षमताओं में काफी इजाफा किया गया।

दोनों देशों के बीच हो चुकी है18दौर की बातचीत

गलवान हिसां के बाद से अब तक इन तीन सालों में भारत और चीन के बीच18 दौर की उच्चस्तरीय वार्ता हो चुकी है। इन बैठकों का उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच कईबिंदुओं पर टकराव को कम करना। साथ हीसैनिकों की वापसी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना और पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर शांती कायम करना है। बदा देंदोनों पक्षों ने गहन राजनयिक और सैन्य वार्ताओं के बाद अनेक क्षेत्रों में सैन्य वापसी की प्रक्रिया पूरी कर ली है।

विपक्ष ने किया केंद्र सरकार पर हमला

वहीं गलवान घाटी के मुद्दे को लेकर विपक्ष एक बार फिर केंद्र सरकार पर हमलावर हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि चीन के मामले पर सरकार ने लोगों को अंधेरे में रखा है। खरगे ने गलवान घाटी में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए ट्विटर पर लिखा, तीन साल पहले गलवान घाटी में अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले 20 वीर जवानों को कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि, मोदी सरकार की नाकामियों के चलते LAC पर इन तीन सालों में पूर्व यथास्थिति अब नहीं है। हम 65 में से 26 Patrolling Points (PP) पर अपना अधिकार खो चुके हैं।

मोदी सरकार की लाल आंख धुंधली पड़ गई है- खरगे

कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए आगे लिखा, हमने संसद में ये मुद्दा कई बार उठाने की कोशिश की है, पर मोदी सरकार देशवासियों को अंधेरे में रखना चाहती है। गलवान पर मोदी जी की CLEAN CHIT की वजह से चीन अपने नापाक इरादों में सफल होता दिख रहा है। ये हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा और देश की अखंडता पर गहरा आघात है। मोदी सरकार की लाल आंख धुंधली पड़ गई है, जिस पर उसने चीनी चश्मा पहन रखा है! विपक्ष में रहकर हमारा काम है, देश को चीनी विस्तारवादी नीति के खिलाफ एकजुट रखना और मोदी सरकार के चीनी चश्मे उतार फेंकना!।

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