चंडीगढ़: लोग अपने बच्चों को इतना प्यार से पालते हैं, उनके लिए अपनी जान तक न्यौछावर कर देते हैं, उनके बच्चों की कोई ख्वाहिश अधूरी न रह जाए इसके लिए वे हर तरह की चुनौतियों का सामना करते हैं। लेकिन क्या बच्चे भी अपने माता-पिता के लिए वैसा करते हैं? ये सवाल आज एक माता-पिता की आत्महत्या ने खड़ा कर दिया। पहले के लोग अपने माता-पिता को भगवान मानते थे, आज भी कुछ लोग ऐसे हैं जो अपने जन्मदाता को सराखों पर रखते हैं लेकिन बदलते जमाने के साथ लोगों अपने स्वार्थ में इतने अंधे होते जा रहे हैं कि भगवान रूपी माता-पिता को आत्महत्या करने पर मजबूर कर देते हैं। दरअसल, खबर हरियाणा से आ रही है जहां एक बुजुर्ग दंपति ने अपने पुत्र और पुत्रवधु के टॉर्चर से परेशान होकर अपनी जान दे दी।
खबर हरियाणा के चरखी दादरी से है जहां अपने परिवार से आहत होकर बुजुर्ग पति-पत्नी ने जहरीला पदार्थ खाकर सुसाइड कर लिया। मामले में एक सुसाइड नोट भी मिला है जिसे पढ़कर किसी पत्थर का दिल पसीज जाए। पुलिस ने वारदात के बाद उनके एक बेटे, दो पुत्र वधू और एक भतीजे के खिलाफ केस दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है। आश्चर्य की बात तो ये है कि मृतक का पोता एक आईएएस अधिकारी है। ऐसे पढ़े-लिखे परिवार में ऐसा कृत्य होना बेहद ही शर्मनाक है।
आपको बता दें कि मूलरूप से गोपी निवासी जगदीशचंद्र (78) और भागली देवी (77) अपने बेटे विरेंद्र के पास बाढड़ा में रहते थे। विरेंद्र आर्य का बेटा विवेक आर्य 2021 में आईएएस बना था और उन्हें हरियाणा कैडर मिला है। बुधवार रात जगदीशचंद्र और उनकी पत्नी भागली देवी ने बाढड़ा स्थित अपने आवास पर जहरीला पदार्थ निगल लिया। देर रात करीब ढाई बजे जगदीशचंद्र ने जहर निगलने की जानकारी पुलिस कंट्रोल रूम में दी। इसके बाद ईआरवी 151 मौके पर पहुंची और बाढड़ा थाने से भी पुलिस टीम को मौके पर बुलाया गया।
पुलिस को जगदीशचंद्र ने सुसाइड नोट सौंपा। वहीं, हालत बिगड़ने पर बुजुर्ग दंपतीको पहले बाढड़ा के निजी अस्पताल ले जाया गया और वहां हालत गंभीर होने के चलते उन्हें दादरी सिविल अस्पताल भेजा गया। दादरी अस्पताल में चिकित्सकों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।
चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज
बाढड़ा थाना पुलिस ने देर रात ही उनके शव कब्जे में लेकर शवगृह में रखवा दिए। वीरवार सुबह पुलिस ने अस्पताल पहुंचकर पोस्टमार्टम के लिए आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी की।
बताया जा रहा है कि सुसाइड नोट के आधार पर बाढड़ा थाना पुलिस ने परिवार के ही चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
बहु ने गलत काम करना शुरु कर दिया- मृतक
सुसाइड नोट में जगदीश चंद्र ने लिखा है कि- मैं जगदीश चंद्र आर्य आपको अपना दुख सुनाता हूं। मेरे बेटों के पास बाढ़ड़ा में 30 करोड़ की संपत्ति है, लेकिन उन के पास मुझे देने के लिए दो रोटी नहीं हैं। मैं अपने छोटे बेटे के पास रहता था। 6 साल पहले उसकी मौत हो गई। कुछ दिन उसकी पत्नी ने उसे रोटी दी, लेकिन बाद में उसने गलत काम धंधा करना शुरू कर दिया। मेरे भतीजे को अपने साथ ले लिया।
मुझे पीटकर घर से निकाला- मृतक
मैने इसका विरोध किया तो उनको यह बात अच्छी नहीं लगी। क्योंकि मेरे रहते हुए वे दोनों गलत काम नहीं कर सकते थे। इसलिए उन्होंने मुझे पीटकर घर से निकाल दिया। मैं दो साल तक अनाथ आश्रम में रहा और फिर आया तो इन्होंने मकान को ताला लगा दिया। इस दौरान मेरी पत्नी को लकवा आया और हम दूसरे बेटे के पास रहने लगे।
नहीं सहा गया इनका जुल्म
अब उन्होंने भी रखने से मना कर दिया और मुझे बासी आटे की रोटी और दो दिन का दही देना शुरू कर दिया। ये मीठा जहर कितने दिन खाता, इसलिए मैंने सल्फास की गोली खा ली। मेरी मौत का कारण मेरी दो पुत्रवधु, एक बेटा व एक भतीजा है। जितने जुल्म इन चारों ने मेरे ऊपर किया, कोई भी संतान अपने माता-पिता पर न करे।
आर्य समाज को दें मेरी संपत्ति
मेरी सुनने वालों से प्रार्थना है कि इतना जुल्म मां-बाप पर नहीं करना चाहिए और सरकार और समाज इनको दंड दे। तब जाकर मेरी आत्मा को शांति मिलेगी। मेरी जमा पूंजी बैंक में दो एफडी और बाढ़ड़ा में दुकान है वो आर्य समाज बाढड़ा को दी जाए।