नई दिल्ली: गुलामी की जंजीरों को तोड़ जब अंग्रेजों से देश को 15 अगस्त 1947 में आजादी मिली। इसके तीन साल बाद देश में भारत का अपना संविधान लागू हुआ। यानी अब हमें लोकतांत्रिक रूप से अपनी सरकार चुनने की शक्ति मिल गई थी। इस खास अवसर पर इंडिया गेट से लेकर राष्ट्रपति भवन तक कर्तव्यपथ का नजारा देखते ही बनता है। देश के विभिन्न हिस्सों की झांकियों के साथ ही भारतीय सेना, वायुसेना, नौसेना की परेड देखते ही बनती है।
26 जनवरी को ही क्यों हुआ संविधान लागू ?
26 जनवरी 1950 में इस दिन संविधान लागू होने के कई कारण थे। देश की आजादी के बाद 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने संविधान अपनाया। इसी दिन संविधान पूर्णत: लोकतांत्रिक प्रणाली के साथ लागू किया गया था। इसी दिन भारत को पूर्ण गणतंत्र घोषित किया गया। 26 जनवरी को संविधान लागू करने के पीछे एक और जो मुख्य कारण था वो ये कि सन् 1930 में इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारत की पूरी तरह से आजादी की घोषणा की थी।
संविधान के वास्तुकार बाबा भीमराव अंबेडकर
गणतंत्र दिवस के इस शुभ अवसर पर हमें अपने संविधान के बारे में कुछ बाते जानना बेहद जरुरी है। देश नियम नीति निर्देशों के आधार पर चलता है। संविधान ही हमें हमारे अधिकारों और कर्तव्यों का बोध करवाता है। जिस संविधान से देश आज आगे बढ़ रहा है। उसका मसौदा भारत रत्न डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने तैयार किया थ। जिन्हें भारतीय संविधान का वास्तुकार कहा जाता है। कई सुधारों और बदलावों के बाद कमेटी के 308सदस्यों ने 24जनवरी 1950हाथ से लिखे कानून की दो कॉपियों पर हस्ताक्षर किये, जिसके दो दिनों बाद 26जनवरी को यह देश में लागू कर दिया गया।
ताकि बना रहे महत्व
26 जनवरी के महत्व को बनाए रखने के लिए उसी दिन भारत को एक लोकतांत्रिक पहचान दी गई।संविधान के लागू होने के बाद पहले से चले आ रहे अंग्रेजों का कानून Government of India Act (1935) को भारतीय संविधान के जरिये भारतीय शासन दस्तावेज के रूप में बदल दिया गया। तभी से हर साल हम भारतवासी 26जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते आ रहे है।
वो घड़ी जब भारत बना गणतंत्र देश
आपको बता दें कि भारत 26जनवरी 1950 को सुबह 10 बजकर 18 मिनट पर एक गणतंत्र राष्ट्र बना। उसके ठीक 6 मिनट बाद 10 बजकर 24 मिनट पर डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। इस दिन पहली बार डॉ. राजेन्द्र प्रसाद राष्ट्रपति के रूप में बग्गी पर बैठकर राष्ट्रपति भवन से बाहर निकले थे, जहां उन्होंने पहली बार सेना की सलामी ली थी और पहली बार उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया था।
इस बार पराक्रम दिवस से हुई शुरूआत
वैसे तो गणतंत्र दिवस का कार्यक्रम आम तौर पर 24 जनवरी से राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार पाने वाले बच्चों के नाम का ऐलान करने के साथ ही शुरू होता है। लेकिन इस बार यह 23 जनवरी को नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती से ही शुरू हो गया। और 25 जनवरी की शाम राष्ट्रपति का देश के नाम संबोधन के साथ 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस का अद्भूत कार्यक्रम आयोजित होता है। 27 जनवरी को प्रधानमंत्री परेड में शामिल हुए एनसीसी कैडेट के साथ मुलाकात करते हैं। वहीं 29 जनवरी को रायसीना हिल्स पर बीटिंग द रिट्रीट कार्यक्रम का मनमोहक आयोजन होता है। जिसमें तीनों सेनाओं के बैंड शानदार धुन के साथ मार्च पास्ट करते हैं, और अंतत: गणतंत्र दिवस का कार्यक्रम संपन्न होता है।