पटना: बिहार के सारण छपरा समेत अन्य कई जिलों में जहरीली शराब से हुई 70 मौतों के बाद अनेक घरों में चीख-पुकार मची है। इस बीच बिहार पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। दरअसल, सारण के पुलिस अधिक्षक संतोष कुमार ने जानकारी दी कि जहरीली शराब के जरिए मौत बेचने वाले पांच सौदागरों को दबोच लिया गया है। एसपी कुमार ने बताया कि राज्य पुलिस द्वारा गठित एक विशेष जांच दल ने एक होम्योपैथी कंपाउंडर को पकड़ा, जो जहरीली शराब त्रासदी का कथित तौर पर मास्टरमाइंड था। इस जहरीली शराब कांड में 38 लोगों की जान चली गई थी।प्रशासन का ये एक्शन पीड़ित परिजनों के लिए मरमह का काम किया है।
एसपी संतोष कुमार ने बताया कि पुलिस ने एक गाड़ी भी जब्त किया है। इसका इस्तेमाल उत्तर प्रदेश से रसायन लाने, सारण में मसरख और उसके आसपास शराब की आपूर्ति करने के लिए किया जाता था। नकली शराब बनाने में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की खाली बोतलें भी बरामद की गईं। एसआईटी ने इस मामले में पहले नौ लोगों को गिरफ्तार किया था।
जिले के एसपी ने कहा कि शुरुआती जांच में पता चला कि मास्टरमाइंड (मुख्य आरोपी) अपने साथियों की मदद से होम्योपैथी दवा और चीनी मिलाकर नकली शराब बनाता था। आरोपी सारण जिले के कई इलाकों में अपने सहयोगियों के माध्यम से अवैध शराब की आपूर्ति करता था।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार लोगों ने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया कि वे सारण जिले में होम्योपैथी दवाओं से बनी नकली शराब की आपूर्ति करते थे और एक आरोपी ने भी इसी शराब का सेवन किया था, लेकिन इलाज के बाद वह बच गया।
इस बीच, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (मुख्यालय) जितेंद्र सिंह गंगवार ने पटना में पत्रकारों से बात करते हुए इस आरोप का खंडन किया कि सारण जिले के एक पुलिस थाने में रखी स्पिरिट जहरीली शराब कांड के लिए जिम्मेदार थी।