कल यानि 1अप्रैल से नए वित्त वर्ष की शुरुआत होने वाली हैं। वहीँ अगर बीते वर्ष की बात करें तो यहाँ के आर्थिक आंकड़े काफी कमजोड़ रहे हैं। ऐसे बहुत सेआकड़े हैं जिनके मोर्चे पर केंद्र सरकार काफी कमजोर रहीं हैं। जिसके कारण सरकार ने इस आकड़ों को बदल दिया। ऐसे ही कुछ आकड़े आपके सामने कुछ इस प्रकार हैं।
बीते फरवरी महीने में जो जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े पेश किए थे, इस आकड़ें को संशोधित कर दिया गया। 2019-20की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 5फीसदी थी, वहीं दूसरी तिमाही में यह 4.5पर था। वहीँ 2019-20की पहली तिमाही में इसको 5.6तथा दूसरी तिमाही में 5.1फीसदी कर दिया गया। मोदी सरकार लगातार तीसरे साल भी अपने राजकोषीय घाटे का लक्ष्य पूरा नहीं कर सकी। चालू वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को बढ़ाकर सरकार ने जीडीपी 3.8फीसदी कर दिया। इससे पहले सरकार के राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 3.3प्रतिशत रखा गया था। आपको बता दे कि सरकार का 2019-20के मार्च तक 4.99लाख करोड़ रुपये कर्ज जुटाने का लक्ष्य रखा है। इससे पहले सरकार का कर्ज जुटाने का लक्ष्य 4.48लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा था। 2019में विनिवेश से 1.05लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य था लेकिन अब यह 65,000करोड़ रुपये हो गया है। इस मतलब यह है कि सरकार जिन कंपनियों के हिस्सेदारी बेचकर रकम जुटाना चाह रही थी, वह पूरा नहीं हो सका।