शनिवार को असम नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस की फ़ाइनल लिस्ट जारी की गयी जिसमें 3 करोड़ 11 लाख 21 हजार लोगों को एनआरसी की फाइनल लिस्ट में जगह मिली जबकि 19 लाख 6 हजार 667 लोगों को लिस्ट से बहार कर दिया गया।
भारत में असम इकलौता राज्य है जहां सिटिजनशिप रजिस्टर की व्यवस्था लागू है। असम में सिटिजनशिप रजिस्टर देश में लागू नागरिकता कानून से अलग है। 1985के असम समझौते के मुताबिक, 24मार्च 1971की आधी रात तक राज्य में प्रवेश करने वाले लोगों को भारतीय नागरिक माना जाएगा। नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) के मुताबिक, जिस व्यक्ति का सिटिजनशिप रजिस्टर में नहीं होता है उसे अवैध नागरिक माना जाता है।
जो लोग एनआरसी में नाम नहीं आने से परेशान हैं, वे फॉरनर्स ट्रिब्यूनल में 120 दिन में अपील कर सकते हैं। असम सरकार राज्य के 400 विदेशी न्यायाधिकरणों की स्थापना करेगी, ताकि उन लोगों के मामलों से निपटा जा सके, जिन्हें अंतिम राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) से बाहर रखा गया है।
नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन भारत में नागरिकता की पहचान करने की सबसे बड़ी प्रक्रिया है। इसका मकसद उन लोगों की पहचान करना है, जो घुसपैठ (खासकर बांग्लादेश से) असम में घुस आए और वहीं रहने लगे।