शुक्रवार को देश के गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति साशन को आगे बढ़ाने के लिए कहा. इस प्रस्ताव का कांग्रेस पार्टी ने जमकर विरोध किया जिसके बाद अमित शाह जवाब देने के लिए आगे आये. शाह ने जवाब में कांग्रेस को खूब खरी खोटी सुनाई , इसके साथ साथ ही पूर्व पीएम नेहरु के ऊपर भी उन्होंने सवाल खड़े किये. शाह की इस बाट पर कांग्रेस ने जमकर हंगामा किया.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस की वजह से देश का बंटवारा धर्म के आधार पर हुआ. अगर कांग्रेस ऐसा न करती तो आज आतंकवाद का मुद्दा ही न होता और न ही पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर हमसे अलग होता. शाह ने कहा कि कांग्रेस हमें इतिहास न सिखाए.
उन्होंने कहा कि तब 600 से अधिक रजवाड़े थे लेकिन तब गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने हर रियासत को हिंदुस्तान में शामिल करवाया. उन्होंने कहा कि हैदराबाद और जूनागढ़ की रियासत, हिंदुस्तान में आने से इनकार कर रही थीं लेकिन ये मुद्दा सरदार पटेल के पास था इसलिए कोई दिक्कत नहीं हुई.
Article 370 is the temporary provision in the Constitution of India: Home Minister Shri @AmitShah in Lok Sabha pic.twitter.com/oPabyAMs15
BJP (@BJP4India) June 28, 2019
इसी दौरान उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर का मुद्दा आखिर किसके पास था, आज वहां धारा 370 लगी है. बस अमित शाह के इतना कहते ही कांग्रेस के सांसदों ने हंगामा करना शुरू कर दिया और अमित शाह का विरोध करने लगे.
जम्मू कश्मीर में पंचायतों को पंच-सरपंच चुनने का अधिकार ही नहीं दिया गया था।
सिर्फ तीन ही परिवार वर्षों तक यहां शासन करते रहे।
आज 40 हजार पंच-सरपंच अपने अधिकार के साथ यहां गांवों का विकास कर रहे हैं।
हमने तो अधिकार दिए हैं, कांग्रेस के समय अधिकार छीने गए थे: श्री अमित शाह pic.twitter.com/H9aNhhMP4C
BJP (@BJP4India) June 28, 2019
बता दें कि अमित शाह ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने का प्रस्ताव लोकसभा में रखा. लेकिन कांग्रेस की तरफ से बोलते हुए मनीष तिवारी ने इसका विरोध किया.