PM Modi spoke at UPSC centenary: दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्लाईदुबई के विमान में सवार 174 लोगों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी का जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि कैप्टन स्मित ने अपनी सूझबूझ और साहस से एक बड़ी घटना को टाल दिया। उन्होंने इजरायल के प्रधानमंत्री की उस बात का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया कि एक हिंदुस्तानी ने 9/11 जैसी घटना होने से बचा लिया।
दरअसल, दुबई से तेल अवीव जा रहे फ्लाईदुबई के विमान में ओमान के को-पायलट ने कथित तौर पर विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश की। इस दौरान उसने कैप्टन स्मित मच्छार पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। घायल होने के बावजूद स्मित ने उसका मुकाबला किया और कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। इसके बाद विमान में मौजूद यात्रियों ने को-पायलट को पकड़ लिया। वहीं, विमान में मौजूद कुछ अन्य पायलटों ने सऊदी अरब में विमान की सुरक्षित लैंडिंग कराई। इस तरह विमान में सवार 174 यात्रियों की जान बच गई।
दुनिया कैप्टन स्मित पर कर रही है गर्व
प्रधानमंत्री मोदी ने समारोह में बताया कि उन्होंने कैप्टन स्मित के पिता भूपेंद्र भाई, माता गीता बहन और पत्नी सोनल से भी बातचीत की है। उन्होंने स्मित के साहस की तारीफ करते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया उन पर गर्व कर रही है। पीएम मोदी ने देशवासियों से कैप्टन स्मित के दीर्घायु होने और उत्तम स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्मित ने भारत का गौरव बढ़ाया है और उनके पराक्रम से हर देशवासी गौरवान्वित है।
UPSC के 100 साल पूरे
UPSC के गठन के 100 साल पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सिर्फ एक संस्था के शताब्दी वर्ष का उत्सव नहीं, बल्कि उसकी विरासत और उस भरोसे का भी उत्सव है, जिसे हर साल लाखों युवा अपने सपनों के साथ जीते हैं। उन्होंने कहा कि इस 100 साल की यात्रा में पीढ़ियां, सरकारें, तकनीक और पाठ्यक्रम बदले, लेकिन UPSC पर लोगों का भरोसा उतना ही मजबूत बना रहा। इस अवसर पर 100 साल के सफर की याद में एक डाक टिकट और सिक्का जारी किया गया। साथ ही 100 अहम कानून से जुड़े मामलों का एक संग्रह भी जारी किया गया। पीएम मोदी ने इस यात्रा से जुड़े सभी लोगों को नमन करते हुए शुभकामनाएं दीं।
विकसित भारत के लिए नेतृत्व की जरूरत
प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है और आने वाले 20-25 साल भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। विकसित भारत के निर्माण के लिए देश को जिस तरह के नेतृत्व की जरूरत है, उसमें UPSC और राज्यों के चयन आयोगों की बड़ी भूमिका है। उन्होंने राष्ट्र प्रथम और नागरिक प्रथम की भावना पर जोर देते हुए कहा कि आज का मंत्र ‘नागरिक देवो भवः’ है।
पीएम मोदी ने बदलते दौर और तकनीक का जिक्र करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता हजारों दस्तावेजों को कुछ ही समय में संसाधित कर सकती है। ऐसे बदलावों के बीच सिविल सेवाओं में भी नई सोच की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ऐसे युवाओं को आगे लाना होगा, जो सरकारी पद से नहीं बल्कि जनसेवा से आकर्षित हों।
उन्होंने कहा कि आज का भारत नए कार्य संस्कृति के साथ आगे बढ़ रहा है और तेजी से बदलते युग व तकनीक के साथ समाज के सामने नई तरह की चुनौतियां भी आ रही हैं। आने वाले समय में लोकसेवकों को इन बदलती परिस्थितियों के बीच काम करना होगा।
गांव-कस्बों के युवाओं और बेटियों की बढ़ी भागीदारी
प्रधानमंत्री ने कहा कि UPSC से जुड़े लोगों को हमेशा याद रखना चाहिए कि उनका काम युवा शक्ति के भविष्य से जुड़ा है। युवा शक्ति से राष्ट्र शक्ति के मिशन में वे महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। उन्होंने कहा कि जब UPSC का गठन हुआ था, तब बड़े शहरों के बड़े घरों के बच्चों को ही इसमें अवसर मिलता था, लेकिन अब गांव और कस्बों के युवा भी इस व्यवस्था तक पहुंच रहे हैं। बेटियों की भागीदारी भी बढ़ी है। पीएम मोदी ने बताया कि UPSC के पूरे इतिहास में चार महिला अध्यक्ष रही हैं, जिनमें से तीन 2014 के बाद बनी हैं।