तेहरान: ईरान में बच्चों के स्कूल पर हमले से लेकर नागरिक और रिहाइशी इलाकों को निशाना बनाए जाने की जब संयुक्त राष्ट्र ने रिपोर्ट दिखाई तो अमेरिका चिढ़ गया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) की सदस्यता और उसमें अपनी भागीदारी आधिकारिक तौर पर समाप्त करने का ऐलान कर दिया।
तेहरान टाइम्स के अनुसार अमेरिकी विदेश विभाग ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद पर अमेरिका विरोधी बयानबाजी को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब संयुक्त राष्ट्र की ईरान से जुड़ी स्वतंत्र जांच रिपोर्ट में अमेरिकी हमलों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
अमेरिकी विदेश विभाग को आया गुस्सा
अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से अलग होने के अपने फैसले की जानकारी गुरुवार शाम दी। अमेरिकी विदेश विभाग ने परिषद पर ‘अमेरिका विरोधी बयानबाजी’ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। इसके साथ ही अमेरिका ने परिषद के साथ अपनी सदस्यता और भागीदारी पूरी तरह समाप्त कर दी है।
अमेरिका का यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों से जुड़े इस प्रमुख संयुक्त राष्ट्र निकाय से उसके संबंधों में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में अमेरिका की ओर से इस फैसले के पीछे अन्य कारणों का विस्तार से उल्लेख नहीं किया गया है।
ईरान पर UN की रिपोर्ट के एक दिन बाद फैसला
रिपोर्ट में जिन घटनाओं का उल्लेख किया गया है, उनमें मिनाब स्थित शाजरेह तैयबेह स्कूल और लामेर्द के एक खेल परिसर पर किए गए हमले शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र मिशन के अनुसार, इन हमलों की परिस्थितियों को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं। संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र तथ्य-जांच मिशन की ईरान से संबंधित रिपोर्ट प्रकाशित होने के ठीक एक दिन बाद अमेरिका ने सदस्यता छोड़ने का ऐलान कर दिया। इससे पहले वह विश्व स्वास्थ्य संगठन से भी सदस्यता छोड़ चुका है। इस रिपोर्ट में मिशन ने कहा कि उसके पास यह निष्कर्ष निकालने के लिए ‘उचित आधार’ हैं कि ईरान में दो हमलों के लिए अमेरिकी सेनाएं जिम्मेदार थीं।
हमलों को युद्ध अपराध माना जा सकता है
संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र तथ्य-जांच मिशन ने कहा कि इन हमलों को युद्ध अपराध की श्रेणी में रखा जा सकता है। रिपोर्ट में अमेरिकी बलों की कथित भूमिका को लेकर सामने आए निष्कर्ष ऐसे समय आए हैं, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है। इस रिपोर्ट के प्रकाशन के अगले ही दिन अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से अपनी सदस्यता और भागीदारी समाप्त करने की घोषणा कर दी। इससे दोनों घटनाक्रमों के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बढ़ गई है।