गुरुग्राम में गुरुवार को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल शामिल हुए। कार्यक्रम में 1947 के विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों और विस्थापन का दर्द झेलने वाले परिवारों को श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान मनोहर लाल ने कहा कि विभाजन की त्रासदी इतिहास का ऐसा काला अध्याय है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन तथा हरियाणा बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष अर्चना गुप्ता भी मौजूद रहीं।
‘नफरत और हिंसा ने लाखों जिंदगियां बदलीं’
मनोहर लाल ने कहा कि 14 अगस्त 1947 का दिन भारतीय इतिहास के सबसे पीड़ादायक अध्यायों में शामिल है। धर्म के आधार पर हुए देश के बंटवारे के बाद पैदा हुई नफरत और हिंसा ने असंख्य लोगों को अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर किया। बड़ी संख्या में लोगों को विस्थापित होना पड़ा और कई लोगों ने अपनी जान गंवाई। उन्होंने कहा कि विभाजन के दर्द को सिर्फ इतिहास का हिस्सा मानकर भूलना नहीं चाहिए। इस त्रासदी में अपना सब कुछ गंवाने वाले लोगों के संघर्ष और बलिदान को याद करना जरूरी है।
पीड़ितों और बलिदानियों को श्रद्धांजलि
मनोहर लाल ने विभाजन के दौरान विस्थापित हुए लोगों, बलिदानियों और पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि यह दिन उस दौर की भयावहता को याद करने के साथ-साथ उससे सबक लेने का अवसर भी देता है।
उन्होंने देशवासियों से अपील की कि राष्ट्रप्रेम को सर्वोपरि रखते हुए देश की एकता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने के लिए मिलकर काम किया जाए। उन्होंने कहा कि विभाजन जैसी त्रासदी से सीख लेते हुए समाज में भाईचारे और एकजुटता की भावना को मजबूत करना समय की जरूरत है। गुरुग्राम में हुए इस कार्यक्रम के जरिए 1947 के विभाजन की पीड़ा को याद करते हुए लोगों को देश की एकता और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने का संदेश दिया गया।