ऑकलैंड: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के न्यूजीलैंड दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई मिली। शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी और न्यूजीलैंड के पीएम क्रिस्टोफर लक्सन ने औपचारिक बैठक में भारत-न्यूजीलैंड संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा देने की घोषणा की। यह भारत के किसी प्रधानमंत्री का न्यूजीलैंड का 40 वर्षों में पहला आधिकारिक दौरा है, जो दोनों देशों के लिए मील का पत्थर साबित हुआ।
2030 तक दोगुना होगा व्यापार
ऑकलैंड के गवर्नमेंट हाउस में हुई उच्चस्तरीय बैठक में दोनों नेताओं ने ‘भारत-न्यूजीलैंड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप: रोडमैप टू 2030’ को मंजूरी दी। इस रोडमैप का लक्ष्य 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को दोगुना करना है। वर्तमान में द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 50 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के तहत न्यूजीलैंड के 95 प्रतिशत निर्यात पर टैरिफ कम या समाप्त हो जाएंगे, जिससे दोनों देशों के किसान, उद्योग और युवा लाभान्वित होंगे।
रक्षा से सुरक्षा और ट्रेड तक में MoU
बैठक के दौरान रक्षा, समुद्री सुरक्षा, कृषि, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण, शिक्षा, पर्यटन, खेल, प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। दोनों पक्षों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सहयोग की रूपरेखा तैयार की। रक्षा बलों के बीच लॉजिस्टिक्स सहायता समझौते समेत कई MoU पर हस्ताक्षर किया।
पीएम मोदी ने न्यूजीलैंड को कहा-प्राकृतिक साझेदार
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और न्यूजीलैंड “प्राकृतिक साझेदार” हैं। लोकतांत्रिक मूल्यों, जन-जन के संबंधों और साझा हितों के आधार पर दोनों देश वैश्विक शांति व विकास में योगदान दे सकते हैं। लक्सन ने मोदी की यात्रा को ऐतिहासिक बताया और कहा कि FTA दोनों अर्थव्यवस्थाओं को नई गति देगा। मोदी ने भारतीय समुदाय को संबोधित किया और न्यूजीलैंड की खेल नवाचार प्रदर्शनी देखी। न्यूजीलैंड में रह रहे भारतीय मूल के लगभग 3 लाख लोगों में उत्साह का माहौल है।
यह दौरा इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया की यात्रा के अंतिम चरण में हुआ। दोनों देशों ने जलवायु परिवर्तन, साइबर सुरक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी प्राथमिकता दी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण होगी।