New Delhi: सुहागिनों का पवित्र व्रत करवा चौथ का पावन पर्व आज पूरे देश में बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। उत्तर भारत, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और कई अन्य क्षेत्रों में लाखों सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की खुशहाली की कामना से निर्जला व्रत रख रही हैं। कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर पड़ने वाले इस व्रत में महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक बिना अन्न-जल के रहती हैं।
दिल्ली में व्रत सुबह करीब 6:31 बजे से शुरू होकर रात 8:17 बजे चंद्रोदय तक चलेगा। पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:38 से 6:56 बजे तक है। कई परिवारों में सास द्वारा दी गई सरगी सुबह सूर्योदय से पहले खाई जाती है, जिसमें फल, मेवे, फेनी, मठरी और मिठाई शामिल होती है।
परंपरा और महत्व
करवा चौथ की जड़ें प्राचीन पुराणों और लोककथाओं में गहरी हैं। सबसे प्रसिद्ध कथा वीरावती की है। उनके सात भाई नकली चांद दिखाकर व्रत खुलवा देते हैं, लेकिन असली चंद्रोदय पर व्रत खोलने की महत्ता सिद्ध होती है। एक अन्य कथा में करवा नाम की स्त्री ने यमराज से अपने पति की रक्षा की थी। माता पार्वती, सावित्री-सत्यवान और द्रौपदी की कथाएं भी इस व्रत से जुड़ी हैं। यह व्रत केवल उपवास नहीं, बल्कि प्रेम, समर्पण, संयम और वैवाहिक बंधन की मजबूती का प्रतीक माना जाता है।
पूजा विधि
दिनभर महिलाएं मेहंदी लगाती हैं, श्रृंगार करती हैं और नए या लाल रंग के वस्त्र पहनती हैं। शाम को करवा माता, शिव-पार्वती, गणेश और कार्तिकेय की पूजा होती है। थाली में दीपक, सिंदूर, अक्षत, फल, मिठाई और मिट्टी या धातु का करवा रखा जाता है। कथा सुनने के बाद थाली को घुमाया जाता है। चांद निकलने पर छलनी से दर्शन कर अर्घ्य दिया जाता है। फिर पति के हाथों से जल लेकर व्रत खोला जाता है। यह पर्व परिवार और समुदाय की एकता को भी मजबूत करता है। आज भी लाखों सुहागिनें इस परंपरा को पूरी श्रद्धा से निभा रही हैं।