नई दिल्ली: अमेरिका ने चाबहार पोर्ट को हमले में पूरी तरह उड़ा दिया है। ईरान के भारत स्थित दूतावास ने चाबहार बंदरगाह पर हुए अमेरिकी हमलों की तीखी आलोचना करते हुए उसे युद्ध अपराध बताया है। दूतावास ने नागरिक एवं आर्थिक ढांचों को निशाना बनाने को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का घोर उल्लंघन बताया।
ईरान इन इंडिया आधिकारिक अकाउंट पर जारी बयान में कहा गया, “नागरिक और आर्थिक आधारभूत संरचनाओं को जानबूझकर लक्षित करना स्पष्ट युद्ध अपराध है। अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय कानून की अवहेलना की है और सशस्त्र संघर्ष में नागरिक संपत्तियों की सुरक्षा के दायित्वों को नजरअंदाज किया है।” बयान के साथ शेयर की गई तस्वीर में चाबहार के शहीद कालांतररी पोर्ट पर मरीन कंट्रोल टावर के ढहने और विशाल धुएं के गुबार की दृश्य दिख रहे हैं।
अमेरिका ने ईरान पर तेज किए हमले
हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 16 जुलाई को अमेरिका ने ईरान के खिलाफ हवाई अभियान तेज किया। चाबहार पोर्ट के निगरानी टावर को निशाना बनाया गया, जिसे अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की समुद्री निगरानी नेटवर्क का हिस्सा बताया। ईरानी मीडिया ने हमलों में जान-माल की क्षति की सूचना दी है।
भारत का था अहम प्रोजेक्ट
चाबहार पोर्ट भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल है। भारत ने यहां शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल विकसित करने में महत्वपूर्ण निवेश किया है, जो अफगानिस्तान और मध्य एशिया के लिए महत्वपूर्ण व्यापारिक गलियारा है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि भारतीय टर्मिनल को प्रत्यक्ष नुकसान नहीं पहुंचा, लेकिन पूरे क्षेत्र में बढ़ते तनाव से सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं।
हॉर्मुज़ फिर बंद
वर्ष 2026 में ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ हरमुज में नौसैनिक ब्लॉकेड लागू किया है और ईरान पर क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया है। ईरान इन हमलों को आक्रामक विस्तारवादी नीति का हिस्सा मानता है। बंदरगाहों पर ऐसे हमले वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। भारत ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है और अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सक्रिय कूटनीति अपना रहा है।
ईरानी दूतावास का यह बयान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मुद्दा उठाने का संकेत देता है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संस्थाओं की भूमिका पर बहस तेज हो गई है, ताकि पश्चिम एशिया में शांति बहाल की जा सके।