नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए डॉग लवर्स और NGOs की सभी याचिकाएं खारिज कर दी हैं। कोर्ट ने साफ कर दिया कि स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और एयरपोर्ट जैसे सार्वजनिक संस्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने का उसका 25 नवंबर का आदेश बरकरार रहेगा। इन्हें वापस नहीं छोड़ा जाएगा।
कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यों ने एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स का पालन नहीं किया, इसलिए हालात बिगड़े। कोर्ट ने टिप्पणी की, “यह सार्वजनिक स्वास्थ्य, सुरक्षा और इकोलॉजिकल बैलेंस का मामला है।” साथ ही एनिमल वेलफेयर बोर्ड के SOP के खिलाफ दायर सभी आवेदनों को खारिज कर दिया।
चौंकाने वाले आंकड़े आए सामने
कोर्ट ने डॉग बाइट के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई। राजस्थान के श्रीगंगानगर में एक महीने में 1084 लोगों को कुत्तों ने काटा। तमिलनाडु में चार महीने में करीब 2 लाख केस दर्ज हुए। दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर जनवरी से अब तक 31 डॉग बाइट की घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं। सूरत में एक जर्मन यात्री को भी कुत्ते ने काटा था। कोर्ट ने कहा कि देशभर में रेबीज से कई मौतें हुई हैं।
राज्यों को चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 7 नवंबर 2025 के आदेश का राज्यों ने सही से पालन नहीं किया। अगर अब भी निर्देशों को लागू करने में लापरवाही हुई तो अवमानना की कार्रवाई होगी। कोर्ट ने NHAI को हाईवे से आवारा मवेशियों को हटाने और गौशाला बनाने के निर्देश भी दिए।
खतरनाक कुत्तों के लिए यूथेनेशिया का सुझाव
कोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी जाए और एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध कराई जाए। गंभीर रूप से बीमार और समाज के लिए खतरा बने संक्रमित कुत्तों के लिए यूथेनेशिया पर विचार किया जाए। साथ ही हाई कोर्ट को आदेश दिया कि वो इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करें और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई करें।
कोर्ट ने दोहराया कि IGI जैसे व्यस्त एयरपोर्ट पर बार-बार डॉग बाइट होना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही दिखाता है और इससे शहरी प्रशासन पर जनता का भरोसा टूटता है।