नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से उत्पन्न संकट का प्रभाव लंबी अवधि तक रहने वाला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और देशवासियों को उसी तरह एकजुट रहना होगा जैसे कोरोना वायरस महामारी के दौरान किया गया था। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह संकट न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती है।
कूटनीति और वैश्विक प्रयास
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस समस्या का समाधान केवल कूटनीति और बातचीत से संभव है। उन्होंने बताया कि इस संकट के दौरान उन्होंने पश्चिम एशिया के अधिकांश राष्ट्राध्यक्षों से फोन पर बातचीत की और सभी ने भारतीयों की सुरक्षा का आश्वासन दिया। मोदी ने कहा कि भारत तनाव को कम करने और संघर्ष समाप्त करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे संकट में कुछ तत्व गलत लाभ उठाने का प्रयास कर सकते हैं, इसलिए कानून और सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रखा गया है।
ऊर्जा और आपूर्ति सुरक्षा
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में ऊर्जा क्षेत्र में उठाए गए कदमों से देश इस संकट में काफी हद तक सुरक्षित है। उन्होंने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के आवागमन में चुनौतियां आने के बावजूद पेट्रोल, डीजल, गैस और एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित नहीं हुई। भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चे तेल का रणनीतिक भंडार है और 65 लाख मीट्रिक टन और बढ़ाने का काम चल रहा है। इसके साथ ही देश में एलपीजी उत्पादन बढ़ाया जा रहा है और पेट्रोल-डीजल की लगातार सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
किसानों और खाद्य सुरक्षा
प्रधानमंत्री ने किसानों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी हरसंभव मदद कर रही है। उन्होंने कहा कि देश में खाद्य भंडार पर्याप्त हैं और खरीफ मौसम की बुवाई सही तरीके से हो रही है। खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यूरिया, डीएपी और एनपीके जैसी खादों के घरेलू उत्पादन और उपलब्धता पर ध्यान दिया गया है। उन्होंने उल्लेख किया कि कोरोना महामारी के समय भी सरकार ने किसानों पर बोझ नहीं डाला।
नवीकरणीय ऊर्जा और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में पिछले एक दशक में बड़े कदम उठाए हैं। सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़कर 140 गीगावाट तक पहुंच गया है। मेट्रो नेटवर्क, 15,000 इलेक्ट्रिक बसों का वितरण और वैकल्पिक ईंधन के उपायों से देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि रेलवे के विद्युतीकरण और विभिन्न पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा परियोजनाओं ने भी डीजल की खपत कम की और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाई।
सुरक्षा, कानून व्यवस्था और मानवता
पीएम मोदी ने कहा कि तटीय सुरक्षा, सीमा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को और मजबूत किया जा रहा है। राज्य सरकारों से कालाबाजारी और जमाखोरी पर कार्रवाई करने का आह्वान किया गया है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत मानवता और शांति के पक्ष में है और युद्ध के माहौल में भी कूटनीति के जरिए भारतीय जहाजों और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा में प्रयास
प्रधानमंत्री ने बताया कि अब तक लगभग 3.75 लाख भारतीय सुरक्षित भारत लौट चुके हैं, जिसमें ईरान से लगभग 1,000 लोग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में भारतीय बच्चों की पढ़ाई सुनिश्चित करने के लिए सीबीएसई ने भी कदम उठाए हैं। प्रभावित देशों में भारत के सभी मिशन भारतीयों की मदद में सक्रिय हैं।
अंतर-मंत्रालयीन समन्वय और वैश्विक सहयोग
प्रधानमंत्री ने कहा कि एक अंतर-मंत्रालयीन समूह प्रतिदिन बैठक करता है और आयात-निर्यात तथा परिवहन से जुड़े मुद्दों का समाधान करता है। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार और उद्योगों के साझा प्रयासों से इस संकट का बेहतर मुकाबला किया जा सकेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत है और पिछले एक दशक में उठाए गए कदम संकट के समय मददगार साबित हो रहे हैं। उन्होंने सभी नागरिकों और राज्य सरकारों से एकजुट होकर हर चुनौती का सामना करने का आह्वान किया। मोदी ने दोहराया कि भारत की नीति स्पष्ट है कूटनीति, शांति और मानवता के पक्ष में रहना और भारतीयों की सुरक्षा सर्वोपरि है।