नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत कृत्रिम मेधा (AI) के व्यावहारिक उपयोगों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य केवल तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि उद्यमों की उत्पादकता बढ़ाना और स्वास्थ्य, कृषि तथा जलवायु परिवर्तन जैसी जनसांख्यिकीय चुनौतियों का समाधान करना है।
युवाओं की भागीदारी और उत्साह को सराहा
वैष्णव ने यह टिप्पणी ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ के शोध संगोष्ठी में की। उन्होंने AI प्रदर्शनी में युवाओं की मजबूत भागीदारी और उनमें दिखे उत्साह की सराहना की। मंत्री ने बताया कि प्रदर्शनी में करीब ढाई लाख लोग शामिल हुए, जिनमें अधिकांश की उम्र 30 वर्ष से कम थी। उन्होंने कहा, “जब मैंने युवाओं से बात की, तो उनकी सकारात्मक प्रतिक्रिया देखकर मुझे हैरानी हुई। यह स्पष्ट है कि युवा इस क्षेत्र में आने वाले अवसरों को लेकर उत्साहित हैं।”
भारत की प्राथमिकताएँ व्यावहारिक AI
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत में AI का उपयोग वास्तविक जीवन की समस्याओं को हल करने, उद्यमों की उत्पादकता बढ़ाने और स्वास्थ्य, कृषि तथा जलवायु परिवर्तन जैसी जनसांख्यिकीय चुनौतियों के समाधान में किया जा रहा है। उन्होंने प्रतिभागियों से AI को सुरक्षित बनाने और इसके व्यावहारिक सुझाव देने का आग्रह किया। मंत्री ने कहा कि AI केवल तकनीकी उपकरण नहीं, बल्कि मानवता के हित में इस्तेमाल होने वाला एक सशक्त माध्यम होना चाहिए।
वैश्विक सम्मेलन और भविष्य की उम्मीद
‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ देश के सबसे बड़े वैश्विक AI सम्मेलनों में से एक है। इसमें नीति निर्माता, उद्योग जगत और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ नवाचार, संचालन व्यवस्था और AI के वास्तविक उपयोगों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत और दुनिया के लिए AI से एक नया भविष्य संभव है। उन्होंने आशा जताई कि युवा और विशेषज्ञ मिलकर AI के सुरक्षित और लाभकारी उपयोग के लिए ठोस कदम उठाएंगे।