Surajkund International Mela:(फरीदाबाद): उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने शनिवार को सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले के 39वें संस्करण का उद्घाटन किया। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री एवं फरीदाबाद सांसद कृष्ण पाल गुर्जर, हरियाणा के विरासत एवं पर्यटन मंत्री अरविंद कुमार शर्मा सहित कई गणमान्य उपस्थित थे।
भारत की सभ्यतागत विरासत के हैं संरक्षक
इस दौरान सी पी राधाकृष्णन कहा कि शिल्पकार भारत की सभ्यतागत विरासत के संरक्षक हैं। राधाकृष्णन ने यह भी बताया कि मेला न केवल कला और संस्कृति का उत्सव है, बल्कि यह शिल्पकारों के सशक्तिकरण और भारत की सांस्कृतिक विविधता को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
सूरजकुंड मेला 31 जनवरी से 15 फरवरी तक आयोजित किया जा रहा है। इसमें देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ अन्य देशों के शिल्प, हथकरघा, संस्कृति और व्यंजनों का प्रदर्शन किया जा रहा है। उपराष्ट्रपति ने कहा, “यह मेला राष्ट्र की सांस्कृतिक आत्मा और आत्मनिर्भर भावना को दर्शाता है, जो ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के आदर्श को समाहित करता है।”
अंतरराष्ट्रीय पवेलियन और सांस्कृतिक कार्यक्रम
राधाकृष्णन ने सहयोगी देश मिस्र के पवेलियन का दौरा किया और वहां प्रदर्शित हस्तशिल्प की सराहना की। उन्होंने मेले के अन्य पवेलियनों और कलाकारों की ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी अवलोकन किया।
शिल्पकारों का सशक्तिकरण और सांस्कृतिक संरक्षण
उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह मेला शिल्पकारों की मेहनत और हुनर को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने शिल्पकारों और कलाकारों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया और कहा कि भारत की सांस्कृतिक विविधता ही देश की ताकत है।
सूरजकुंड मेला हर साल लाखों पर्यटकों और कलाकारों को आकर्षित करता है। इसमें विभिन्न राज्यों और देशों के पवेलियन, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और व्यंजन शामिल होते हैं। यह आयोजन भारत की परंपरागत कला और संस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार का एक प्रमुख मंच है।