India US Trade War: (वॉशिंगटन): भारत के साथ टैरिफ विवाद छिड़ने के बाद अमेरिका के साथ व्यापार पर आशंका के बादल मंडरा गए हैं। क्या आगे भी अमेरिका भारत से और भारत अमेरिका के साथ व्यापार जारी रख सकते हैं?…इस सवाल पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि जब तक भारत के साथ शुल्क (टैरिफ) से जुड़ा मुद्दा सुलझ नहीं जाता, तब तक दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता संभव नहीं है।
अमेरिका ने लगाया है भारत पर सबसे ज्यादा शुल्क
भारत से चिढ़े डोनाल्ड ट्रंप ने सबसे ज्यादा शुल्क लगाया है। अमेरिका ने दुनिया में सबसे ज्यादा जिन दो देशों पर शुल्क लगाया है, उनमें भारत और ब्राजील हैं। इन दोनों पर ही अमेरिका ने 50-50 फीसदी का टैरिफ लगाया है। ओवल ऑफिस में गुरुवार को मीडिया से बातचीत में ट्रंप से पूछा गया कि भारत पर 50% शुल्क लगाने के फैसले के बाद क्या व्यापार वार्ता की कोई संभावना है। इस पर उन्होंने दो टूक कहा, “तब तक नहीं, जब तक यह मुद्दा हल नहीं हो जाता।”
27 अगस्त से 50 फीसदी शुल्क होगा लागू
हाल ही में ट्रंप ने भारत पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा की थी, जो 7 अगस्त से लागू हो गया है। अतिरिक्त 25% शुल्क 27 अगस्त से प्रभावी होगा। भारत के विदेश मंत्रालय ने इस कदम को “अनुचित और अविवेकपूर्ण” बताते हुए कहा है कि भारत अपनी राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा। इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए, प्रमुख भारतीय-अमेरिकी अटॉर्नी रवि बत्रा ने कहा कि ट्रंप की शुल्क नीति के चलते भारत-अमेरिका संबंधों पर काफी कुछ दांव पर लगा है। उन्होंने रूस और यूक्रेन के युद्ध का हवाला देते हुए कहा कि रूस पर दबाव डालने के लिए भारत को निशाना बनाना उल्टा नुकसानदायक हो सकता है।
रूस से तेल खरीदना जारी रखने पर चिढ़ा अमेरिका
अमेरिका ने कई बार भारत को रूस से तल खरीदना बंद करने की चेतावनी दी, लेकिन भारत ने राष्ट्रपति ट्रंप की बात मानने से साफ इंकार कर दिया। इसके बाद अमेरिका चिढ़ गया। रवि बत्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर कहा, “भारत को नुकसान पहुंचाना, रूस को नुकसान पहुंचाने के बराबर है, लेकिन इसका खामियाजा हमें भी भुगतना पड़ सकता है।” उन्होंने अमेरिका से रणनीति में पुनः विचार और परिपक्व पुन: नियोजन की अपील की ताकि एक ‘डोमिनो प्रभाव’ से बचा जा सके, जो वैश्विक स्थिरता को नुकसान पहुंचा सकता है।