‘दुर्गा भाभी’ नाटक का दूसरा दिन: आजादी की लड़ाई में भगत सिंह की पत्नी बनकर दिया था अंग्रेजों को चकमा

Delhi: नई दिल्ली के मंडी हाउस में आजादी की लड़ाई में बलिदान देने वाली दुर्गा भाभी नाटक का मंचन किया गया। दुर्गा भाभी ने आजादी की लड़ाई में भगत सिंह को बचाया था और अंग्रेजी हुकुमत को चकमा दिया था। दुर्गा भाभी ने एक मौके पर शहीद भगत की पत्नी बनकर आजादी के आंदोलन को जीवित रखा था। इस वीरांगना के जीवन पर पहली बार नाटक का मंचन किया जा रहा है।

बता दे कि, नाटक के दूसरे दिन का मंचन मंडी हाउस में स्थित राष्ट्रीय नाट्य विद्लाय के अभिमंच प्रेक्षागृह में किया गया। राजधानी के लोगों को गुमनाम क्रांतिकारियों में से एक दुर्गा भाभी के जीवन पर आधारित नाटक की प्रस्तुति देखने को मिली। दूसरे दिन के कार्यक्रम में पूर्व राज्यसभा सांसद आर. के. सिन्हा और संस्कृति मंत्रालय के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

बीजेपी के पूर्व राज्यसभा सांसद आर. के. सिन्हा का कहना है कि दुर्गा भाभी गुमनाम क्रांतिकारियों में से एक हैं जिन्होंने आजादी की लड़ाई में तन मन से भाग लिया। आजादी के दिनों में दुर्गा भाभी क्रांतिकारियों को अपने घर में पनाह देने के अलावे उनके खाने पीने के अलावा सभी आर्थिक जरूरतों को पूरा करती थी।

पूर्व सांसद ने आगे जानकारी देते हुए कहा कि इस नाटक के देशभर में 50से अधिक मंचन होंगे। इससे पहले इसका मंचन पटना और गाजियाबाद में भी किया गया है। अनेकों क्रांतिकारियों समेत शहीद चंद्रशेखर आजाद को माउजर और पिस्टल उपलब्ध कराने से लेकर शहीद भगत सिंह और राजगुरु को अपने तीन वर्षीय पुत्र के साथ लाहौर से निकालने का कार्य दुर्गा भाभी ने ही अंजाम तक पहुंचाया था।

भारत के गुमनाम क्रांतिकारियों को प्रकाश में लाने के अभियान में आजादी की दीवानी दुर्गा भाभी नाटक मील का पत्थर साबित हुआ। नाटक के निर्देशक एवं लेखक अक्षयवर नाथ श्रीवास्तव ने कहा कि 19दिसंबर, 1928को राजगुरु, भगत सिंह और सुखदेव ने सांडर्स नाम के एक अंग्रेज़ अफ़सर, जिसने लाला लाजपत राय पर ताबड़तोड़ लाठियां चलायी थीं, का वध कर दिया था।

अपने काम को पूर करने के बाद भगत सिंह अंग्रेज़ी साहब बनकर तथा राजगुरु उनके सेवक बनकर पुलिस को चकमा देकर लाहौर से निकल गए थे। उस समय भगत सिंह और राज गुरु के साथ दुर्गा भाभी भी थीं। वो भगत सिंह की पत्नी बनी हुईं थीं। दुर्गा भाभी का पूरा नाम दुर्गा देवी वोहरा था। लेकिन वो मशहूर दुर्गा भाभी के रूप में हुई। अफसोस की बात यह है कि दिल्ली में उनके नाम पर कोई सड़क या स्कूल नहीं है।

इस नाटक का मंचन करने वाले कलाकारों में तनुपाल, शिवम सिंघल, अभिषेक त्यागी, कुमार सौरभ, राजीव वैद, सिमरन मिश्रा, रूकेशव साधना, बालकृष्ण श्रीवास्तव, निशांत शर्मा, अनिरुद्ध शर्मा, विनय कुमार, नेहा पाल, साक्षी देशवाल, मनु वर्मा, कल्याणी मिश्रा, जतिन शर्मा, श्रेयस अग्निहोत्री, ऋषभ सहगल, नीरज शर्मा, इमप्रीत सिंह, शौर्य केसरवानी, राहुल, सुभाष शर्मा, तरुण योगी, आभास, प्रवीण डहल, निखिल, दिव्यांशु भट्ट, अमन, देव आदि प्रमुख थे।

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