नयी दिल्ली: महान धाविका व उड़न परी जैसे उपमाओं से जाने जानेवाली पिलावुलकंडी थेक्केपारंबिल उषा यानी पीटी उषा का नाम भला किसने नहीं सुना होगा और जिसने नहीं भी सुना होगा उसकी जुबान पर भी एक बार फिर से पीटी उषा का नाम गूंजेगा। क्योंकि पीटी उषा अब भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष चुनी गई हैं। बड़ी बात यह है कि उनका चयन निर्विरोध हुआ है। उनके चयन से भारत खिलाड़ियों को अंतरर्राष्ट्रीय पर होने वाले प्रतिस्पद्र्धाओं में उनके अनुभव का लाभ मिलेगा।
यूं हुआ चयन
पीटी उषा ने अपनी टीम के 14 अन्य लोगों के साथ रविवार को अध्यक्ष पद के लिए नॉमिनेशन दाखिल किया था। आखिरी दिन कोई और इस पद के लिए नॉमिनेशन दाखिल नहीं हुआ। ऐसे में कई एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता इस प्रक्रिया में IOA की पहली महिला अध्यक्ष बनेंगी।
केंद्रीय कानून मंत्री किरन रिजिजू ने पीटी उषा को IOA अध्यक्ष चुने जाने पर बधाई दी। उन्होंने अपने बधाई संदेश में कहा है कि, दिग्गज गोल्डन गर्ल, पीटी उषा को भारतीय ओलंपिक संघ का अध्यक्ष चुने जाने पर बधाई। मैं अपने देश के सभी खेल नायकों को भी प्रतिष्ठित IOA का पदाधिकारी बनने पर बधाई देता हूं! देश को उन पर गर्व है।
ऐसा रहा जीवन
पद्मश्री पीटी उषा का जन्म 27 जून 1964 में पय्योली गांव में हुआ था, इन्हें पीटी उषा नाम से ही जाना जाता है। उनके पिता का नाम इ पी एम् पैतल है, एवं माता का नाम टी वी लक्ष्मी. पी टी उषा का बचपन में बहुत स्वास्थ्य ख़राब था, लेकिन इन्होने अपने प्राइमरी स्कूल के दिनों में अपनी हेल्थ सुधार ली, और लोगों को इनके अंदर एक महान एथलीट की छवि दिखाई देने लगी। 1976 में केरल सरकार ने कन्नूर में एक महिला खेल सेंटर की शुरुआत की। 12 साल की पी टी उषा उन 40 महिलाओं में से थी, जिनका चयन यहां ट्रेनिंग के लिए हुआ था। इनके पहले कोच ओ.एम्. नम्बिअर थे। 1979 में पी टी उषा पहली बार लाइमलाइट में आई, जब उन्होंने नेशनल स्पोर्ट्स गेम्स में व्यक्तिगत चैम्पियनशिप जीती। अपने असाधारण प्रदर्शन के चलते उषा को क्वीन ऑफ़ इंडियन ट्रैक एवं पय्योली एक्सप्रेस नाम का ख़िताब दिया गया है। पी टी उषा आज केरल में एथलीट स्कूल चलाती है, जहाँ वे अपनी प्रतिभा का ज्ञान दूसरों बच्चों को भी देती है.
इन पदकों को किया अपने नाम
उड़न परी के नाम से मशहूर पीटी उषा देश के सबसे चर्चित एथलीटों में से एक हैं। उषा ने 1982 और 1994 के एशियाई खेलों में चार स्वर्ण सहित 11 पदक जीते हैं। इसके साथ ही उन्होंने 1986 के सियोल एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया था। इसके अलावा 100 मीटर रेस में भी रजत पदक हासिल किया था भी। उषा ने 1982 के नई दिल्ली एशियाई खेलों में 100 मीटर और 200 मीटर की रेस में भी पदक जीते। उन्होंने 1983 से 1998 तक एशियाई चैंपियनशिप में 14 स्वर्ण सहित कुल 23 पदक जीते। स्प्रिंट क्वीन को 1984 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक 400 मीटर बाधा दौड़ के फाइनल में पदक से चूकने के लिए सबसे ज्यादा याद किया जाता है, जहां उन्हें रोमानिया की क्रिस्टियाना कोजोकारू ने सेकंड के सौवें हिस्से से हराया था।
उल्लेखनीय है कि पीटी उषा आईओए के 95 साल के इतिहास में अध्यक्ष बनने वाली पहली ओलंपियन है।