असम में 31 अगस्त को जारी एनआरसी की अंतिम सूची में कई परिवारों के नाम नहीं आने से संकट पैदा हो रही है। ऐसा ही, असम के बारपेट जिले में एक शिक्षक परिवार के साथ अनहोनी ही हो गई है। इस परिवार में 50 लोग हैं लेकिन इनमें से किसी का भी नाम इस लिस्ट में नहीं है।
असम के बारपेट ज़िले के अहमद हुसैन के सात भाई के साथ रहते है। उनके परिवार में 15 बच्चे है जिनमे किसी का भी नाम नहीं आया है। अहमद हुसैन के एक भाई का नाम ड्राफ्ट में था लेकिन अंतिम सूची में सभी बाहर हो गए। वहीँ अहमद हुसैन का कहना है कि, हमारे भाई ने 1966 के दस्तावेज दिए तो हमें सरकार ने कई नोटिस भेजा, हम चार बार सुनवाई में शामिल हुए, फिर भी अंतिम एनआरसी में हमारा नाम नहीं आया, अब हम बहुत परेशान हैं, हमें भविष्य की चिंता सता रही है। हम एक बार फिर से आवेदन करेंगे, हमें बस सरकार के नोटिस का इंतजार है। अहमद हुसैन जो की पेशे से एक शिक्षक है वे कहते है कि उन्होंने अपने पिता हरमुज अली भुइयां से जुड़े दस्तावेज प्राथमिक स्कूल में जमा किए थे।
बता दें कि जिनका नाम एनआरसी से बाहर है उन्हें 120 दिन के अंदर विदेशी ट्रिब्यूनल के सामने अपनी नागरिकता साबित करनी होगी। 19 लाख लोगों को 4 महीने के अंदर सालों पुरानी अपनी पहचान सरकार के सामने साबित करनी है। ये प्रक्रिया न सिर्फ कानूनी पेचिदिगियों से भरी है, बल्कि गरीबी में पलने-बढ़ने वाले लोगों के लिए खर्चीली भी है।