भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने नई आर्थिक नीति पर सवाल उठाते हुए ट्वीट कर कहा कियदि कोई नई आर्थिक नीति नहीं लाई जाती है तो पांच ट्रिलियन अर्थव्यवस्था को गुडबाय कहने के लिए तैयार हो जाइये. अकेले केवल साहस या केवल ज्ञान चरमराती अर्थव्यवस्था को नहीं बचा सकते हैं. इसके लिए दोनों की जरूरत है. आज हमारे पास दोनों में से कुछ नहीं है.
दरअसल संसद में जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश किया था तो उन्होंने देश के सामने पांच ट्रिलियन अर्थव्यवस्था का लक्ष्य रखा था. प्रधानमंत्री ने भी कहा था कि यदि हम सब मिलकर काम करेंगे तो यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है. इसी लक्ष्य पर स्वामी ने ट्वीट करके इसे गुडबाय कहने को तैयार रहने के लिए कहा है. वहीं कांग्रेस ने भी अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, लगातार कई तिमाहियों से मंदी की स्थिति बनी हुई है. लेकिन सरकार इससे निपटने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है. हमें लगता है कि शायद भाजपा सरकार को समझ नहीं आ रहा कि क्या किया जाए? ऐसे में जिम्मेदार विपक्ष के नाते हमारे कुछ सुझाव हैं.
बता दें कि सरकार अब आर्थिक मंदी को रोकने के लिए लगातार कई कदम उठा रही है जिसमें बड़े पैमाने पर बैंकों का विलय करना शामिल है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार निवेश पर ध्यान नहीं देती है तो अर्थव्यस्था को संभालना मुश्किल हो जाएगा. पिछले कुछ महीनों से कमजोर मांग और निवेश की कमी के कारण मुख्य उद्योगों की वृद्धि में मंदी दिखाई दे रही है. वहीं मंदी का असर सबसे ज्यादा जिन क्षेत्रों पर पड़ा है उसमें ऑटोमोबाइल, मैन्युफैक्चरिंग और रीयल एस्टेट शामिल है.