भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर ने रविवार को अपनी राजनीतिक पार्टी की घोषणा कर दिया। पार्टी का नाम आजाद समाज पार्टी (एएसपी) रखा गया है। बसपा संस्थापक कांशीराम की जयंती पर चंद्रशेखर ने अपनी सियासी पार्टी की घोषणा की। नोएडा के सेक्टर 51 स्थित अशोका वाइट फार्म में आयोजित एक समारोह के दौरान उन्होंने अपनी पार्टी लॉन्च की। इसके अलावा चंद्रशेखर ने अपनी पार्टी के झंडे का रंग नीला रखा है जबकि मायावती की पार्टी के झंडे का रंग भी नीला ही है। इससे समझा जा सकता है कि चंद्रशेखर की नजर दलित समुदाय और बसपा के वोटबैंक पर है।
माना जा रहा है कि चंद्रशेखर के इस कदम से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा होगी और इससे एक नया समीकरण बन सकता है। चंद्रशेखर मायावती के लिए मुश्किल पैदा कर सकते है। बसपा प्रमुख कई बार आरोप लगा चुकी हैं कि चंद्रशेखर सत्ताधारी दल के इशारे पर काम कर रहे हैं। पार्टी लॉन्चिंग के दौरान बीएसपी के करीब 15 पूर्व विधायक और 3 पूर्व सांसदों ने भी नए राजनीतिक दल की सदस्यता ली है। हालांकि अपने नेताओं के चंद्रशेखर के पाले में जाने पर मायावती भड़क गईं। उन्होंने एक बयान जारी कर इशारों में चंद्रशेखर और पार्टी छोड़कर जा चुके नेताओं को जमकर निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, अलग-अलग संगठन और पार्टी बनाकर इन दुखी और पीड़ित लोगों को बांटने में लगे लोगों से इन वर्गों (दलित) को कोई फायदा नहीं होगा। ऐसा करने से विरोधी पार्टियों की फूट डालो और राज करो की नीति जरूर कामयाब हो जाएगी।
दिलचस्प है कि पार्टी लॉन्च करने से पहले चंद्रशेखर ने ट्विटर पर अपने आधिकारिक अकाउंट पर कांशीराम की तस्वीर लगाई है। पार्टी लॉन्च करने के बाद उन्होंने ट्विटर प्रोफाइल की कवर फोटो को बदलकर भी आजाद समाज पार्टी का बैनर लगाया है। उधर भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद की नई पार्टी के ऐलान से पहले यूपी में टकराव की स्थिति बनते-बनते रह गई।
बता दें कि उत्तर प्रदेश में दलितों की आबादी लगभग 21 फीसदी से 23 फीसदी है। दलितों का यह समाज दो हिस्सों में बंटा है। पहला जाटव, जिनकी आबादी करीब 14 फीसदी है और जो मायावती की बिरादरी है। चंद्रशेखर भी जाटव हैं, ऐसे में अब चंद्रशेखर ने मायावती की चिंता को बढ़ा दिया है। वहीं, गैर-जाटव वोटों की आबादी करीब 8 फीसदी है। इनमें 50-60 जातियां और उप-जातियां हैं। पिछले चार चुनावों में हार का मुंह देख चुकीं मायावती का लगातार वोट शेयर और आधार घट रहा है। ऐसे में मायावती की परेशानी को चंद्रशेखर ने बढ़ा दिया है।