PM मोदी ने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने का किया आह्वान, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाने पर जोर

(नई दिल्ली): प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के सभी किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने पर विचार करने की अपील की और कहा कि इससे कृषि से जुड़े कई गंभीर मुद्दों का समाधान हो सकता है। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता, नमी और दीर्घकालिक स्थिरता प्रभावित होती है।

‘वन एकड़, वन सीजन’ से शुरुआत करने की सलाह

पीएम मोदी ने किसानों को छोटे भूखंड से शुरुआत करने के लिए प्रेरित किया ताकि उन्हें आत्मविश्वास मिले और बाद में बड़े स्तर पर इसे अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिल सके। प्रधानमंत्री ने ‘लिंक्डइन’ पर पोस्ट में कहा कि उन्होंने 19 नवंबर को कोयंबटूर में दक्षिण भारत प्राकृतिक खेती सम्मेलन 2025 में भाग लिया, जहां उन्हें किसानों के एक समूह ने आमंत्रित किया था।

किसानों और उद्यमियों की प्रेरक कहानी

प्रधानमंत्री ने बताया कि सम्मेलन में वैज्ञानिक, एफपीओ नेता, स्नातक, पारंपरिक किसान और कॉर्पोरेट नौकरियां छोड़कर खेती अपनाने वाले लोग शामिल थे। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों और आधुनिक पारिस्थितिक सिद्धांतों पर आधारित है। यह विविधीकृत खेतों को बढ़ावा देती है और मिट्टी के स्वास्थ्य को सुधारने के लिए बाहरी संसाधनों पर कम निर्भर रहती है।

व्यक्तिगत उदाहरण और प्रभाव

पीएम मोदी ने एक किसान का उदाहरण दिया जो लगभग 10 एकड़ में केला, नारियल, पपीता, काली मिर्च और हल्दी की खेती कर रहा है। वह 60 देसी गायों, 400 बकरियों और मुर्गियों का पालन भी करता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस तरह के प्रयास किसानों में आत्मविश्वास पैदा करते हैं और अन्य किसानों को भी प्रेरित करते हैं।

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन और सरकारी पहलें

प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन देशभर में लाखों किसानों को जोड़ चुका है। सरकार निर्यात को बढ़ावा देने, किसान क्रेडिट कार्ड और पीएम-किसान जैसी योजनाओं के जरिए प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित कर रही है। पीएम मोदी ने सम्मेलन को यादगार बताते हुए कहा कि इससे मानसिकता, कल्पना और आत्मविश्वास में बदलाव देखने को मिला। उन्होंने कहा कि भारत के किसान और कृषि उद्यमी कृषि के भविष्य को नई सोच और आत्मविश्वास के साथ आकार दे रहे हैं।h

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